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नई दिल्ली। गाम्बिया और उज्बेकिस्तान के 84 बच्चों की मौत के दावे के बाद भारत में बन रहे कफ सिरप की गुणवत्ता पर उठे सवाल के बाद केन्द्र सरकार ने इसके निर्यात से पहले निर्धारित सरकारी प्रयोगशाला में गुणवत्ता जांच को आवश्यक कर दिया है।

पिछले साल गाम्बिया में 66 और उज्बेकिस्तान में 18 बच्चों की मौत हुई थी। दावा किया गया था कि ये मौतें भारत में बनी खांसी की दवाइयों को पीने के बाद हुई हैं।

इस संबंध में मंगलवार को विदेश व्यापार महानिदेशालय ने जारी एक अधिसूचना में कहा कि निर्यात किए जाने वाले उत्पाद के नमूने का प्रयोगशाला में परीक्षण होने के बाद ही कफ सिरप का निर्यात करने की अनुमति मिलेगी। नई व्यवस्था एक जून से लागू हो जाएगी।


एक्ट में संशोधन कर निर्यातकों को एक जून से कफ सिरप विदेश भेजने से पहले निर्धारित सरकारी प्रयोगशालाओं में परीक्षण कराना जरूरी होगा। इन प्रयोगशालाओं में गाजियाबाद स्थित इंडियन फार्मोकोपिया कमिशन, सीडीएल कोलकाता, सीडीटीएल चेन्नई, सीडीटीएल मुंबई, सीडीटीएल हैदराबाद, आरडीटीएल चंडीगढ़, आरडीटीएल गुवाहाटी और किसी भी एनएबीएल मान्यता प्राप्त स्टेट ड्रग टेस्टिंग लैब शामिल हैं।

उल्लेखनीय है कि पिछले साल गाम्बिया और उजबेकिस्तान में कफ सिरप पीने से हुई कई बच्चों की मौत के लिए भारत-निर्मित कफ सिरप को कथित तौर पर दोषी बताया गया था।

 

 


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