नई दिल्ली। दुनिया में मंकीपॉक्स (Monkeypox) के मामले मिलने के केंद्र सरकार अलर्ट मोड पर आ गई है। देश के सभी पोर्ट, एयरपोर्ट के साथ पाकिस्तान और बांग्लादेश से सटे बॉर्डर पर अलर्ट जारी किया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अधिकारियों को बाहर से आने वाले यात्रियों में मंकीपॉक्स के लक्षणों को लेकर सतर्क रहने के लिए कहा है।
ऑफिशियल सूत्रों ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिल्ली में केंद्र के तीन बड़े अस्पतालों- राम मनोहर लोहिया, सफदरजंग और लेडी हार्डिंग में नोडल सेंटर्स बनाए हैं। इन अस्पतालों में मंकीपॉक्स के मरीजों के इलाज और देखभाल के लिए आइसोलेशन वार्ड बनाए गए हैं।
केंद्र ने सभी राज्य सरकारों को भी उनके राज्य के अस्पतालों में मंकीपॉक्स के मरीजों के लिए जरूरी व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। भारत में अभी मंकीपॉक्स का कोई मामला सामने नहीं आया है। अधिकारियों ने बताया कि अभी तक के आकलन के मुताबिक, मंकीपॉक्स के बड़े पैमाने पर फैलने का खतरा कम है। इसे शॉर्ट में एमपॉक्स भी कहते हैं।
बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 14 अगस्त को मंकीपॉक्स को ग्लोबल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है। यह दो साल में दूसरी बार है, जब इस बीमारी को हेल्थ इमरजेंसी बताया गया है।
WHO की रिपोर्ट के मुताबिक, मंकीपॉक्स की शुरुआत अफ्रीकी देश कांगो से हुई थी। अफ्रीका के दस देश इसकी गंभीर चपेट में हैं। इसके बाद ये तेजी से पड़ोसी देशों में फैली। आशंका है कि यह दुनिया के दूसरे देशों में भी फैल सकती है।
क्या है मंकीपॉक्स
मंकीपॉक्स चेचक जैसी एक वायरल बीमारी है। आमतौर इस वायरस से संक्रमण के ज्यादा दुष्प्रभाव नहीं होते हैं, लेकिन कुछ मामलों में यह घातक हो सकता है। इसके चलते फ्लू जैसे लक्षण दिखते हैं और शरीर पर मवाद से भरे घाव हो जाते हैं। यह वायरस ऑर्थोपॉक्सवायरस जीनस फैमिली का ही मेंबर है, जो चेचक (स्मालपॉक्स) के लिए भी जिम्मेदार है।
मंकी पॉक्स के लक्षण
मंकी पॉक्स का इंफेक्शन होने पर सबसे पहले मरीज को बुखार आने की शुरुआत होती है। इसके अलावा शरीर पर चकत्ते बनना शुरू हो जाते हैं। ये चकत्ते चेहरे पर या प्राइवेट पार्ट्स के आसपास हो सकते हैं। इसके अलावा चकत्ते सफेद, पीली फुंसियों में तब्दील हो सकते हैं जिनमें पस भर जाता है।
इसके अलावा चकत्ते में खूब खुजली और दर्द होता है। मरीज को सिरदर्द रहने के साथ ही मसल्स में पैन होने लगता है। बच्चे, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर इम्यूनिटी के लोगों को इस वायरस को लेकर विशेष एहतियात बरतने की जरूरत होती है।
कैसे फैलता है मंकी पॉक्स?
मंकी पॉक्स एक संक्रामक रोग है जो जानवरों से इंसानों में प्रवेश करता है। वायरस से संक्रमित होने के बाद 21 दिन बाद इसके लक्षण सामने आ सकते हैं। इसका असर भी 14 से 21 दिन तक रह सकता है। राहत की बात ये है कि इस बीमारी की वैक्सीन भी है। मंकी पॉक्स मुख्य तौर पर संक्रमित मरीज के संपर्क में आने पर फैलता है।
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