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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चल रहे 100 दिवसीय सघन ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) अभियान के पहले 69 दिन में स्वास्थ्यकर्मियों ने बेहतरीन काम किया है। अब तक 75 जिलों में 92,362 मरीज चिंहित हुए हैं। इसके अलावा 76 प्रतिशत उच्च जोखिम वाले लोगों तक विभागीय टीम पहुंच चुकी है। 12.61 लाख से अधिक लोगों को टीबी के बचाव की दवा खिलाई गई है।

प्रदेश को इसी वर्ष टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य है। इसी के मद्देनजर पूरे प्रदेश में 100 दिवसीय सघन अभियान चलाया जा रहा है। राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ शैलेंद्र भटनागर के मुताबिक उच्च जोखिम वाले लक्षणविहीन लोगों को एक्सरे स्क्रीनिंग किया जा रहा है.

उन्होंने बताया कि सभी 75 जनपदों में लगभग साढ़े तीन करोड़ की उच्च जोखिम की जनसंख्या को आच्छादित कर 2.61 करोड़ लोगों की टीबी के संभावित लक्षणों के आधार पर स्क्रीनिंग की गई और एक्सरे, नॉट या माइक्रोस्कोपिक जाँच की गई। अभियान के दौरान कुल 4.91 लाख नि:क्षय शिविर लगाकर टीबी की स्क्रीनिंग की गई और जागरूकता अभियान चलाया गया। औसतन प्रतिदिन 4849 नि:क्षय शिविर लगाए गए।  

डॉ. भटनागर ने बताया कि अब तक अभियान में सर्वाधिक 4174 टीबी के मरीज लखनऊ में मिले हैं। इसके बाद आगरा में 3636, सीतापुर में 2908, अलीगढ़ में 2856, कानपुर नगर में 2772  केस मिले हैं।  

उन्होंने बताया कि पूरे प्रदेश में सबसे कम केस श्रावस्ती 255 में मिले हैं। इसके बाद महोबा में 313, चित्रकूट में 354, शामली में 373 और संत रवीदास नगर में 375  मरीज मिले हैं।

डॉ भटनागर ने बताया कि सात दिसम्बर से उन 15 जनपदों में 100 दिवसीय टीबी सघन अभियान शुरू हुआ था जहाँ टीबी से होने वाली मौतों की संख्या अधिक थी और नए टीबी रोगियों और संभावित टीबी रोगियों की पहचान दर राष्ट्रीय औसत से कम थी। दिसम्बर के अंतिम सप्ताह में माननीय मुख्यमंत्री जी ने अभियान की समीक्षा करते हुए इस अभियान को सभी 75 जनपदों में लागू करने के निर्देश दिए थे।

उच्च जोखिम वाले समूह
• 60 साल से अधिक आयु के लोग 
• 18.5 किग्रा/मी2 से कम बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) की कुपोषित जनसँख्या 
• डायबिटीज एवं एचआईवी के रोगी 
• पुराने टीबी मरीज़ पांच वर्ष के भीतर
• तीन वर्ष के भीतर टीबी मरीज़ जिनका उपचार पूरा हुआ, के संपर्क मे रहने वाले
• झुग्गी-झोपड़ियों, जेलों, वृद्धाश्रमों आदि में रहने वाले लोग
• धूम्रपान एवं नशा करने वाले रोगी


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