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लखनऊ।   निजीकरण के खिलाफ लखनऊ में बिजली कर्मियों ने सोमवार को शक्ति भवन का घेराव किया है। बड़ी संख्या में पहुंचे कर्मचारी बिजली निजीकरण का विरोध कर रहे हैं। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट नियुक्ति का विरोध कर रही है। संघर्ष समिति के प्रदर्शन को देखते हुए सोमवार को खुलने वाले पावर कॉर्पोरेशन के टेंडर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया दिया गया है।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने कहा- पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का फैसला तत्काल रद्द किया जाए।
5 अप्रैल 2018 और 6 अक्टूबर 2020 के समझौतों का सम्मान करते हुए कर्मचारियों को विश्वास में लेकर विद्युत वितरण व्यवस्था में सुधार की दिशा में कार्य किया जाए।

उत्तर प्रदेश विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने कहा कि जब तक निजीकरण का फैसला वापस नहीं ले लिया जाएगा तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। उत्तर प्रदेश के 42 जनपदों के विद्युत वितरण के निजीकरण का ऐलान किया गया था, उसका हम विरोध कर रहे हैं। आज 96 दिनों से हम लोग आंदोलन कर रहे हैं।


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