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लखनऊ। योग गर्भवती व धात्री महिलाओं के लिए काफी फायदेमंद है। यह न सिर्फ शरीर को गर्भधारण के लिए लचीला बनाता है बल्कि स्तनपान बढ़ाने में मददगार साबित होता है।

राजाजीपुरम के योगा प्रशिक्षक अरुण शुक्ला के अनुसार योग की विभिन्न मुद्राएं शरीर को सक्रिय रखने में सहायक होती हैं। गर्भावस्था में ऐसे सौम्य योग करना चाहिए जो शरीर को लचीलापन बढ़ाएं, पीठ दर्द कम करें और सामान्य प्रसव में मदद करें।

योगा प्रशिक्षक ने बताया कि स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए ऐसे योगासन सबसे अच्छे होते हैं जो शारीरिक थकान व पीठ दर्द को दूर करें। मानसिक शांति दें व ब्रेस्ट मिल्क का उत्पादन बढ़ाने में सहायक हों। योगासन हमेशा खाली पेट करें या स्तनपान कराने के बाद करें ताकि पेट पर दबाव न पड़े। योग के दौरान खुद को हाइड्रेड रखें।

किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ अंजू अग्रवाल ने कहा कि योग करना निश्चित तौर पर फायदेमंद है। गर्भवती महिला व धात्री महिलाओं को अपनी क्षमता अनुसार योग करना चाहिए।

गर्भावस्था के योगासन

1.    तितली आसान (वद्ध कोणासन)-  यह कूल्हों को लचीला बनाता है और पेल्विक हिस्से को खोलता है जो प्रसव के समय बहुत सहायक होता है। 
2.    मार्जरी आसन (कैट काऊ स्ट्रेच)- यह रीढ़ की हड्डी के तनाव को कम करता है और पीठ के निचले हिस्से के दर्द से राहत दिलाता है। 
3.    त्रिकोणासनः यह शरीर का संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है। और पैरों तथा पीठ को मजबूती देता है।    


धात्री महिलाओं के लिए योगासन  

1.    मार्जरासन ( कैट काऊ पोज)-  इसे बिल्ली-गाय मुद्रा भी कहते हैं। यह रीढ़ की हड्डी के दर्द को कम करता है और पेट की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। 
2.    बालासन (चाइल्ड पोज)- यह एक बहुत ही आरामदायक आसन है जो पीठ, गर्दन व कंधों के तनाव को दूर करता है। 
3.    ताड़ासनः शरीर को सीधा रखने और पाश्चर को सुधारने में मदद करता है।
4.    सेतुबंधासन (ब्रिज पोज)- यह आसन पीठ व पेल्विक क्षेत्र की मांसपेशियों को आराम देता है और रक्त संचार को बेहतर करता है। 
5.    अनुलोम-विलोम व भ्रामरी प्राणायामः यह आसन मन को शांत करते हैं। हार्मोन को संतुलित करते हैं और तनाव को दूर करने में सहायक होते हैं।


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