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नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को लोकसभा में अपने बजट भाषण में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि शिक्षा से रोजगार और उद्यम पर फोकस किया जाएगा। विकसित भारत का कोर ड्राइवर सेवा क्षेत्र रहेगा। इसके लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाई जाएगी। यह कृतिम बौद्धिकता (एआई) समेत प्रौद्योगिकियों से पड़ने वाले असर का आकलन करेगी।

उन्होंने कहा कि दुनियाभर में सम्मान हासिल कर चुकी प्राचीन योग पद्धति और आयुर्वेद पर जोर दिया जाएगा। तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेदिक संस्थान बनाए जाएंगे। वित्तमंत्री ने कहा कि गेमिंग, कॉमिक जैसे सेक्टर में 2030 तक 20 लाख पेशेवरों की जरूरत है। पूर्वी भारत में नए राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान की स्थापना होगी।

वित्त मंत्री ने कहा कि पांच विश्वविद्यालय टाउनशिप की बड़े औद्योगिक और लॉजिस्टिक गलियारों के पास स्थापना होगी। हर जिले में एक महिला छात्रावास बनेगा। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी की स्थापना होगी। 20 प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों पर 10 हजार गाइड के कौशल बढ़ाने की योजना शुरू होगी। नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड स्थापित होगी।

वित्त मंत्री ने कहा दक्षता आधारित रोजगार पर ध्यान दिया जाएगा। स्वास्थ्य पेशेवर बनाने वाले संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा। रेडियोलॉजी, एनेस्थीशिया जैसे क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा। अगले पांच वर्ष में एक लाख एएचपी जोड़े जाएंगे। 1.5 लाख केयर गिवर्स को प्रशिक्षित किया जाएगा।

सीतारमण ने कहा कि मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए पांच क्षेत्रीय मेडिकल हब बनाए जाएंगे। इसमें निजी क्षेत्र की सहभागिता रहेगी। हेल्थकेयर कॉम्प्लेक्स बनेंगे। इनमें आयुष केंद्र होंगे। डायग्नोस्टिक, पोस्टर केयर और रीहैब के केंद्र रहेंगे। इससे स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। 

वहीं देश में बढ़ती मधुमेह, कैंसर, हृदय, किडनी और लिवर से जुड़ी बीमारियों जैसे- गैर संक्रामक रोगों को देखते हुए सरकार अगले 5 सालों में फार्मा और बायो‑टेक सेक्टर के विकास में 10 हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी। (हि.स.)

 


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