बरेली। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केन्द्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान (सीएआरआई) बरेली ने 45 वें स्थापना दिवस के वार्षिकोत्सव के शुभ अवसर पर आज 02 नवम्बर, को “विराट कुक्कुट मेला” आयोजन किया गया।
समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. आर.सी. अग्रवाल, उप महानिदेशक (कृषि ,शिक्षा), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली ने मॉं सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर तथा उनके सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर विराट कुक्कुट मेला का उद्घाटन किया।
इससे पहले उन्होंने सीएआरआई के विभिन्न कुक्कुट फार्मों का निरीक्षण किया। डॉ. अग्रवाल ने सीएआरआई परिवार को सीएआरआई के 45वें स्थापना दिवस की बधाई एवं शुभकामनाऍं दिया तथा समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए यह आवश्यक है नई प्रौद्योगिकियों को अपनाया जाये उन्होंने मेले में उपस्थित किसानों, कुक्कुट पालकों, उद्यमियों तथा संस्थान के वैज्ञानिकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है, यहॉं अधिकांश लोग परम्परागत ढंग से कृषि कार्य कर रहे हैं।

हमें कृषि कार्य में परम्परा और आधुनिक विज्ञान की नई-नई टेक्नोलॉजी को साथ मिलाकर मिलाकर काम करना है। वर्तमान समय में सरकारी संस्थान, स्टार्टअप और किसानों को मिलकर काम करना है। अब केवल टेक्नोलॉजी के ट्रांसफर से काम नहीं हो पा रहा है। इसलिए उन्हें फंडिंग भी की जाएगी और तकनीकी जानकारी प्रदान कर उनके काम को आगे बढ़ाने में उनकी मदद की जाएगी। किसानों की आवश्यकताओं के बारे में जानकारी लेकर उनकी मदद की जाएगी।
मुख्य अतिथि ने सीएआरआई द्वारा विकसित उन्नत नस्ल की ‘कैरी समृद्धि’ का नामकरण किया। इसके साथ ही साथ ‘कैरी टॉक्सोमिन, कैरी एग पेड़ा, कैरी मल्टीग्रेन एग बिस्कुट, कैरी टेक्नोलॉजी एंड सर्विसेस नामक पुस्तिका का विमोचन किया।
डीएपीएससी परियोजना के अन्तर्गत चूजे, कुक्कुट आवास तथा बुखारी का वितरण किया गया। मुख्य अतिथ द्वारा सीएआरआई से सहायता प्राप्त एवं कुक्कुट पालन में सफल किसानों को सम्मानित किया गया, जिनमें बरेली जनपद के भदपुरा ब्लॉक के ग्राम जवेदा-जवेदी की श्रीमती विनीता देवी पत्नी रिशिपाल, ब्लाक नवाबगंज के गाम रम्पुरा काजियान की श्रीमती बबीता देवी पत्नी श्री कृपाल सिंह, ब्लॉक रिठौरा के ग्राम जाटवपुरा के श्री परमानन्द सुपुत्र मुरारी लाल को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
फार्मर फर्स्ट कार्यक्रम के अन्तर्गत ब्लॉक आलमपुर जाफराबाद के ग्राम नौरंग पुर के रमेश सिंह सुपुत्र मेंदु सिंह को सम्मानित किया गया, जिनकी कक्कुट पालन व्यवसाय से पिछले तीन माह की आमदनी रू. सात लाख थी।
मुख्य अतिथि तथा अन्य विशिष्ट अतिथियों ने सीएआरआई के फार्मों का भ्रमण किया। विशिष्ट अतिथि डॉ. त्रिवेणी दत्त, निदेशक, आईवीआरआई ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आईवीआरआई को कृषि शिक्षा के हब के रूप में विकसित किया जा रहा है और अब यहॉं पशु चिकित्सा विज्ञान में बैचलर डिग्री, मास्टर डिग्री तथा पी.एचडी. के साथ-साथ एम.बी.ए. तथा बायोटेक्नोलॉजी के पाठ्क्रम भी शुरू किए जा रहे हैं।
संस्थान के निदेशक डॉ. अशोक कुमार तिवारी ने स्वागत सम्बोधन प्रस्तुत किया एवं संस्थान की उपलब्धियों के बारे में विस्तार से बताया ।
संस्थान के वैज्ञानिकों ने डॉ. अग्रवाल को “विराट कुक्कुट मेले” में सीएआरआई द्वारा लगाई गई लाइव-स्टॉक प्रदर्शनी- मुर्गी, बटेर, गिनी फाउल, टर्की आदि की जानकारी दी। कुक्कुट मेले में मुर्गी अण्डा - मांस व अन्य पोल्ट्री प्रोडक्ट्स की प्रदर्शनी व बिक्री की गई। इसके साथ-साथ संस्थान के निदेशक व वैज्ञानिकों ने मेले में आए अन्य संस्थानों व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की स्टालों का भ्रमण कराया।
इस अवसर पर दूर-दराज गॉंवों आए कुक्कुट उद्यमी, कुक्कुट पालक, किसान, स्कूल के छात्र-छात्राऍं तथा संस्थान के सभी वैज्ञानिक, अधिकारी तथा कर्मचारी शामिल थे। मुख्य अतिथि तथा विशिष्ट अतिथि सहित कार्यक्रम में उपस्थित सभी के प्रति डॉ. जगबीर सिंह त्यागी ने आभार प्रकट किया। डॉ. सिम्मी तोमर तथा डॉ. दिव्या ने मंच सज्जा तथ डॉ. सिम्मी तोमर ने कार्यक्रम का संचालन किया।
मुर्गियों के लिए बनाए गए हैं आलीशान मकान
बरेली। केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने मुर्गियों के आराम से घूमने फिरने और रहने के लिए आरामदायक मकान भी बनाए हैं जिन्हें स्थापना दिवस के कुक्कुट मेले के अवसर पर जनता को प्रदर्शित करने के लिए भी रखा गया था। पूछ के बनाए गए इन मकानों के अंदर मुर्गियां आराम से रह सकती हैं और मकान के बाहर बनाए गए आंगन में घूम फिर कर और दाना खाकर फिर अपने मकान के अंदर आराम कर सकती हैं।
डायरेक्टर डॉक्टर अशोक कुमार तिवारी कहते हैं कि उनके संस्थान के प्रस्ताव पर ही अब महसूस किया जा रहा है कि मुर्गियों को रहने के लिए सबसे आरामदायक जगह खुले में रहें ना कि पिंजरे में बहुमंजली मकान बनाकर रखा जाए।
शोध में पता चला है कि खुले में रहने वाली मुर्गियां में न केवल उत्पादन क्षमता ज्यादा होती है बल्कि उनका वजन भी तेजी के साथ बढ़ता है और स्वस्थ भी रहती हैं। डॉक्टर तिवारी बताते हैं कि संस्थान के वैज्ञानिकों ने कैरी समृद्धि नाम से नई नस्ल तैयार की है जिसे आज पहली बार स्थापना दिवस पर जनता के सामने प्रस्तुत किया गया।
- संजीव गंभीर, बरेली
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