इस्लामाबाद। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में सेना और बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) के लड़ाकों के बीच पिछले 24 घंटे से लड़ाई जारी है। पाकिस्तान सुरक्षाबलों ने 27 लड़ाकों को मार गिराया है। बलूचों से 214 बंधकों में से 155 को छुड़ा लिया है। 59 अभी भी कब्जे में हैं।
पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने बताया कि रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। एयरफोर्स और सेना के जवान बलूच लड़ाकों को घेरे हुए हैं। विद्रोही विस्फोटक से लदे आत्मघाती जैकेट पहने हुए हैं, इससे बाकी बंधकों को रिहा कराने में मुश्किल हो रही है। वे इन्हें मानव शील्ड की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।
बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने कल यानी मंगलवार को दोपहर 1 बजे जाफर एक्सप्रेस पर हमला कर उसे हाईजैक कर लिया था। 30 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिकों को मारने का दावा भी किया।
बलूचों की क्या है मांग
बलूचों को पहली और सबसे बड़ी मांग है कि बलूचिस्तान में पाकिस्तान की किसी भी एजेंसी का कोई प्रतिनिधि नहीं होना चाहिए। संगठन का मानना है कि चीन के साथ सीपीईसी प्रोजेक्ट से बलूचिस्तान की खनिज संपदा का लगातार दोहन हो रहा है और इसके चलते बड़ी संख्या में बलूच समुदाय के लोग विस्थापित हुए हैं। बलूच इस प्रोजेक्ट के यहां से हटाने की लगातार मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही पाकिस्तान की जेलों में बंद अपने साथियों को तत्काल रिहा करने की भी मांग कर रहे हैं। अपनी इन मांगों को लेकर बीएलए पिछले कई सालों से पाकिस्तान पर हमले करता रहा है।
कब हुई संगठन की स्थापना
भारत-पाकिस्तान बंटवारे के समय से ही बलूचिस्तान के लोगों का मानना था कि वह स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता चाहता था लेकिन उसे जबर्दस्ती पाकिस्तान में शामिल कर लिया गया। यह असंतोष समय के साथ बढ़ता गया और बलूचिस्तान की आजादी की मांग को लेकर कई संगठनों के बीच बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) सबसे ताकतवर बनकर उभरा। माना जाता है कि 1970 में इस संगठन की नींव पड़ी और जुल्फिकार अली भुट्टो की सरकार खिलाफ बलोचों ने सशस्त्र विद्रोह की शुरुआत कर दी। 26 अगस्त 2006 को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के ऑपरेशन में बीएलए के प्रमुख नेता रहे बलोचिस्तान के पूर्व मुख्यमंत्री सरदार अकबर खान बुगती की हत्या ने बीएलए के गुस्से को और भड़का दिया।
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