देहरादून। कृषि और कृषक कल्याण मंत्री ने गुरुवार को ''रेशम कीट सरल कृषि बीमा'' योजना का शुभारंभ किया। इस दौरान मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड (Uttarakhand News ) देश का पहला राज्य बन गया है, जिसने इस योजना की शुरुआत की है। अभी चार जनपदों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इस योजना को प्रारंभ किया गया है।
सुभाष रोड स्थित एक निजी होटल में विभागीय मंत्री गणेश जोशी ने राज्य के रेशम कीट पालकों के लिए भारतीय कृषि बीमा कंपनी की ओर से रेशम निदेशालय, उत्तराखंड के सहयोग से योजना का शुभारंभ किया।
मंत्री जोशी ने बताया कि वर्तमान समय में पूरे प्रदेश में रेशम के कार्यों से लगभग 12000 कृषक परिवार जुड़े हैं। इनमें से गतवर्ष 6691 किसानों ने शहतूती रेशम का कीट पालन कार्य करते हुए लगभग 300 मीट्रिक टन रेशम का उत्पादन किया है।
उन्होंने कहा कि किसानों के हितों के संरक्षण पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विशेष ध्यान है। देश के किसानों को अधिक से अधिक लाभ मिले और आर्थिक स्तर में सुधार हो, इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर अनेक योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। प्राकृतिक कारणों से किसानों को होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाने के राष्ट्रीय स्तर पर कई सार्थक प्रयास किये जा रहे हैं, जिसमें से एक फसल बीमा योजना का संचालन भी है।
उन्होंने कहा कि इसी को ध्यान में रखते हुए हमारे राज्य उत्तराखंड में भी कृषि कार्यों से जुड़े किसानों को प्राकृतिक कारणों से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए फसल बीमा के क्षेत्र में भारतीय कृषि बीमा कम्पनी की ओर से फसलों का बीमा किया जा रहा है।
मंत्री ने बताया कि भारतीय कृषि बीमा कम्पनी की ओर से प्रदेश में वर्ष 2016 की खरीफ फसल से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना चलाई जा रही है। इस योजना के अन्तर्गत अब तक 4.90 लाख किसानों को लगभग 480 करोड़ की धनराशि प्राकृतिक कारणों से उनकी फसलों की क्षतिपूर्ति के रूप में प्रदान की जा चुकी है। सरकार की प्राथमिकता फसल बीमा योजना के साथ ही कृषि से संबद्ध अन्य क्षेत्रों से जुड़े किसानों जैसे- रेशम, मत्स्य, पशुपालन इत्यादि को भी योजना का लाभ पहुंचाने का है। इसी पहल के अन्तर्गत आज रेशम निदेशालय एवं भारतीय कृषि बीमा कम्पनी की ओर से सरल कृषि बीमा में रेशम कीट बीमा योजना का शुभारम्भ किया गया है।
मंत्री ने बताया कि कीट पालन का कार्य करने के लिए मौसम का अनुकूल होना जरूरी होता है। अत्यधिक गर्मी या अत्यधिक वर्षा के कारण रेशम के कीटों में बीमारी आने की बहुत अधिक सम्भावना होती है, जिससे हमारे किसानों भाईयों को उनके मेहनताने का पूरा लाभ नहीं मिल पाता है। किसान भाइयों को होने वाले इस नुकसान से बचाने के लिए प्रदेश के चार जनपदों देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल एवं ऊधमसिंह नगर के 5 विकास- खण्ड़ों के 250 किसानों को वर्तमान में इस योजना से आच्छादित करते हुए पायलट प्रोजेक्ट के रूप में योजना को प्रारम्भ करने का निर्णय लिया गया है। यदि योजना के उत्साहवर्धक परिणाम रहा तो आने वाले सालों में हम पूरे प्रदेश के रेशम से जुड़े किसानों को इस योजना के अन्तर्गत लाभान्वित करेंगे।
मंत्री जोशी ने कहा कि उनके संज्ञान लाया गया है कि राज्य के अधिकांश किसान रेशम कीट पालन का कार्य कर रहे हैं। किसान लघु/ सीमान्त श्रेणी के हैं और आर्थिक रूप से सम्पन्न नहीं है। जिस कारण बीमित धनराशि के प्रीमियम का भुगतान करने में सक्षम नहीं हैं।
आने वाले वर्षों में प्रीमियम का भुगतान राज्य सरका वहन करेगी-
इस मौके पर मंत्री गणेश जोशी ने घोषणा करते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में बीमा प्रीमियम धनराशि का भुगतान राज्य सरकार की ओर से वहन किया जायेगा। जिसके लिए निदेशक, रेशम उत्तराखण्ड, तत्काल प्रस्ताव तैयार कर शासन को उपलब्ध करायें।
इस मौके पर रेशम फेडरेशन अध्यक्ष अजीत चौधरी, सीएमडी भारतीय कृषि बीमा कम्पनी गिरिजा सुब्रमन्यम, निदेशक रेशम विभाग आन्नद कुमार यादव, सीजीएम नाबार्ड वी.के. बिष्ट, डीजीएम आरबीआई मनोज कुमार, जीएम भारतीय कृषि बीमा कम्पनी डी.सिंह, सीईओ पशुपालन आर.के.नेगी, चाय बोर्ड निदेशक जगदीश कैंप सहित कई लोग उपस्थित रहे।
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