बागेश्वर/ देहरादून। उत्तराखंड के समाज कल्याण और परिवहन मंत्री चंदन राम दास का गुरुवार को सरयू-गोमती और विलुप्त सरस्वती नदी के संगम के तट पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। चिता को मुखाग्नि उनके बेटे गौरव दास और भाष्कर दास ने दी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पूर्व सीएम भगत सिंह कोश्यारी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट सहित अन्य लोगों ने मंत्री चंदन राम दास के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र चढ़ाकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। चंदन राम दास के निधन पर प्रदेश में तीन दिवसीय राजकीय शोक घोषित किया गया है।
गुरुवार को मंत्री चंदन राम दास की अंतिम विदाई में जन सैलाब उमड़ पड़ा। उनके शव को दर्शन के लिए भाजपा कार्यालय मंडलसेरा परिसर में रखा गया। वहां पर हजारों की संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं, विभिन्न संगठनों, व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने मंत्री चंदन राम दास के अंतिम दर्शन किए।
करीब दस बजे उनकी शव यात्रा निकली, जिसमें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी शामिल हुए। मंत्री चंदन राम दास की चिता को मुखाग्नि उनके बेटे गौरव दास और भाष्कर दास ने दी। इसके बाद पुलिस की टुकड़ी ने उन्हें अंतिम सलामी दी।
मंत्री चंदन रामदास के अंतिम विदाई देने के लिए बागेश्वर में भी लोगों की भीड़ उमड़ी। मुख्यमंत्री ,पूर्व राज्यपाल भगत सिंह और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के अलावा मंत्री सुबोध उनियाल, प्रेम चंद्र अग्रवाल, सौरभ बहुगुणा, रेखा आर्या, जिलाध्यक्ष इंद्र सिंह फर्स्वाण समेत कपकोट विधायक सुरेश गढ़िया, जिलाधिकारी अनुराधा पाल और एसपी हिमांशु कुमार वर्मा सहित बड़ी संख्या में नेताओं ने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र चढ़ाकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
काबीना मंत्री चंदन राम दास (65) का बुधवार दोपहर एक बजे कार्डियक अरेस्ट के कारण निधन हो गया था। चंदन राम दास मंगलवार को देर सायं अपने गृह जनपद पहुंचे थे। बुधवार को उन्हें जिला योजना की बैठक सहित विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होना था। बुधवार सुबह से उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने पर दोपहर करीब 12 बजे के आसपास जिला चिकित्सालय में आईसीयू में भर्ती कराया गया था, लेकिन उनका स्वास्थ्य लगातार गिरने लगा। ब्लड प्रेशर कंट्रोल नहीं होने के कारण कार्डियक अरेस्ट होने पर उन्होंने अंतिम सांस ली।
छात्र नेता से शुरू किया था अपना राजनीतिक सफर-
चंदनराम दास ने अपना राजनीतिक सफर अस्सी के दशक में बतौर छात्र नेता से शुरू किया। एमबी डिग्री कालेज हल्द्वानी में बीए प्रथम वर्ष में निर्विरोध संयुक्त सचिव बने। 1980 से राजनीति जीवन की शुरूआत की। इसके उपरांत वह 1997 में नगर पालिका बागेश्वर में निर्दलीय पालिका अध्यक्ष बने। पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी की प्रेरणा से 2006 में भाजपा में शामिल हुए। वह 2007, 2012, 2017 और 2022 में वह लगातार चौथी बार विधायक चुने गए। अपने सौम्य व्यवहार के चलते वह आम जनता के चहेते नेता थे।
Read More: Uttarakhand Board Result: 10वीं में अक्षत गोपाल, 12वीं में गीतिका पंत और सुशीला मेंहदीरत्ता टॉपर




