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न्यूयॉर्क/ नई दिल्ली। यदि आप को जोड़ों में दर्द, सूजन, थकावट, बुखार, चकत्ते और बेचैनी लक्षण महसूस हो रहे हैं तो आप ऑटोइम्यून बीमारियों की चपेट में आ गए हैं। एक नए अध्ययन में पाया गया है कि ऑटोइम्यून बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए सूजन को नियंत्रित करने में अदरक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

शोधकर्ताओं ने न्यूट्रोफिल नामक श्वेत रक्त कोशिका के एक प्रकार पर अदरक के प्रभाव का अध्ययन किया। वे विशेष रूप से न्यूट्रोफिल एक्स्ट्रासेलुलर ट्रैप (एनईटी) गठन में रुचि रखते थे, जिसे नेटोसिस भी कहा जाता है और सूजन को नियंत्रित करने के लिए इसका क्या अर्थ हो सकता है।

जेसीआई इनसाइट जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, स्वस्थ व्यक्तियों के अदरक का सेवन उनके न्यूट्रोफिल को नेटोसिस के प्रति अधिक प्रतिरोधी बनाता है। यह अहम है क्योंकि एनईटी सूक्ष्म मकड़ी के जाले जैसी संरचनाएं हैं, जो सूजन और थक्के को बढ़ाती हैं, जो ल्यूपस, एंटीफॉस्फोलिपिड सिंड्रोम और रुमेटीइड गठिया सहित कई ऑटोइम्यून बीमारियों को नियंत्रित करने में योगदान करती हैं।

अमेरिका के कोलोराडो स्कूल ऑफ मेडिसिन विश्वविद्यालय में मेडिसिन के एसोसिएट क्रिस्टन डेमोरुएल ने कहा, ऐसी बहुत सी बीमारियां हैं, जिनमें न्यूट्रोफिल असामान्य रूप से अति सक्रिय होते हैं। हमने पाया कि अदरक नेटोसिस को रोकने में मदद कर सकता है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एक प्राकृतिक पूरक है, जो कई अलग-अलग ऑटोइम्यून बीमारियों वाले लोगों के लिए सूजन और लक्षणों का इलाज करने में सहायक हो सकता है।

क्लीनिकल टेस्ट के दौरान, शोधकर्ताओं ने पाया कि हेल्थ वालंटियर्स द्वारा सात दिनों तक अदरक के पूरक के दैनिक सेवन (20 मिलीग्राम जिंजरोल्स/दिन) ने न्यूट्रोफिल के अंदर सीएएमपी नामक एक रसायन को बढ़ावा दिया। सीएएमपी के इन उच्च स्तरों ने विभिन्न रोग-संबंधी उत्तेजनाओं के जवाब में नेटोसिस को रोक दिया।

मिशिगन विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर, एमडी, पीएचडी, वरिष्ठ सह-लेखक, जेसन नाइट ने कहा, हमारा शोध, पहली बार, जैविक तंत्र के लिए सबूत है जो लोगों में अदरक के स्पष्ट सूजन-रोधी गुणों को रेखांकित करता है।

शोधकर्ताओं को उम्मीद थी कि अदरक के लाभों के बारे में अधिक सबूत प्रदान करना, जिसमें प्रत्यक्ष तंत्र भी शामिल है, जिससे अदरक न्यूट्रोफिल को प्रभावित करता है, स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं और मरीजों को इस बात पर चर्चा करने के लिए प्रोत्साहित करेगा कि क्या उनके उपचार योजना के हिस्से के रूप में अदरक लेना फायदेमंद हो सकता है।

ऑटोइम्यून बीमारियां क्या होती हैं?

जब हमारे शरीर का इम्यून सिस्टम हमारी स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला कर देता है तो इसे ऑटोइम्यून डिजीज कहा जाता है. किसी भी बाहरी (वायरस, बैक्टीरिया) हमले से हमें बचाने के लिए हमारा इम्यून सिस्टम एंटीबॉडी बनाता है, लेकिन कई बार इसमें गड़बड़ी के चलते यह स्वस्थ कोशिकाओं को बाहरी तत्व समझकर उन पर भी हमला कर देता है. हालांकि, जब किसी व्यक्ति को ऑटोइम्यून बीमारियां होती हैं तो उनका शरीर ऑटो एंटीबॉडी बनाना शुरू कर देता है जो अपने ही टिश्यू के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करती हैं.

ऑटोइम्यून बीमारी हमारे शरीर के किसी भी उत्तक पर हमला कर सकती है, फिर चाहे वह खून (ल्यूपस), त्वचा (सोरायसिस), मासपेशियां (मायोसाइटिस), जोड़ (रूमेटॉइड आर्थराइटिस), थायरॉइड जैसी एंडोक्राइन ग्लैंड (ऑटोइम्यून थायरॉइड) और पैंक्रियाज (डायबिटीज टाइप 1) ही क्यों ना हों. इससे अंग क्षतिग्रस्त हो सकते हैं, उनके कामकाज में परिवर्तन हो सकता है और किसी अंग में असमान्य रूप से वृद्धि भी हो सकती है.

ऑटोइम्यून बीमारियों के लक्षण

जोड़ों में दर्द और सूजन

थकावट

बुखार

चकत्ते

बेचैनी


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