देहरादून। उत्तराखंड को बारिश से निजात नहीं मिलने वाली है। मानसून पूरे जुलाई पीछा नहीं छोड़ने वाला है। पहाड़ से लेकर मैदान तक बारिश के चलते जनजीवन प्रभावित है। मौसम विज्ञान केंद्र की मानें तो राज्य में बारिश का दौर जारी रहेगा। बारिश के तीव्र से अति तीव्र दौर का येलो अलर्ट जारी किया गया है।
मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक डॉ. बिक्रम सिंह ने 19 जुलाई तक प्रदेश में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। राज्य के अधिकांश क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश व कुछ स्थानों पर आकाशीय बिजली चमकने और बारिश के तीव्र से अति तीव्र दौर की संभावना है। पहाड़ों पर बारिश की वजह से नदियों का जलस्तर उफान पर है। लिहाजा मैदानी क्षेत्र में कई इलाके जलमग्न हो गए हैं। लगातार सड़कें भी अवरुद्ध हो रही हैं।
मौसम के प्रभाव की बात करें तो संवेदनशील इलाकों में कहीं-कहीं मध्यम भू-स्खलन एवं चट्टान गिरने के कारण सड़कों पर अवरोध उत्पन्न हो सकता है। कहीं-कहीं जान-माल की नुकसान की संभावना है। पिघलने वाली बर्फ पर भारी बारिश से नालों और नदियों में जल प्रवाह में अचानक वृद्धि हो सकती है। ऐसे में बाढ़ की संभावना है।
निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति का अनुमान है। फिसलन भरी सड़कों पर कम दृश्यता की वजह से ड्राइविंग की कठिन स्थिति के कारण यात्रा समय में थोड़ी वृद्धि होने की संभावना है। वहीं बागवानी, कृषि फसल (जैसे चावल, मक्का, बाजरा, सेम, चना आदि), पौधरोपण और अनाज की गुणवत्ता को मामूली नुकसान हो सकता है। हवाई अड्डों के लिए उड़ान संचालन प्रभावित हो सकता है। जिले के विभिन्न हेलीपैडों से आने-जाने वाले हेलीकॉप्टर का संचालन प्रभावित हो सकता है। कहीं-कहीं बिजली गिरने से जान-माल की हानि हो सकती है।
भू-स्खलन की आशंका वाले संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। राज्य में चारधाम या अन्य स्थानों की यात्रा करने वाले तीर्थयात्री-पर्यटक सतर्क रहें और यात्रा करते समय खड़ी ढलानों पर नजर रखें। नदी-नालों व निचले इलाकों के समीप रहने वाले लोगों तथा बस्तियों को सावधान रहने की जरूरत है। पर्वतारोहण अभियान, सर्द व गीली स्थितियों के लिए एहतियात बरतने की जरुरत है। यात्रियों या वाहन से यात्रा करने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। इसके लिए मीडिया रिपोर्टों की निगरानी करें। मौसम के पूर्वानुमान जानें। भारी बारिश के दौरान नालों में तैरने या नौका विहार न करें।
मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक ने किसानों को सलाह दी है कि वे कटी हुई उपज को सुरक्षित और सूखी जगह पर रखें। कटी हुई उपज (यदि खेत में हो) को सुरक्षित स्थान पर रखें। राज्य सरकार के अधिकारियों को लोगों की सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक कार्यवाही करने की सलाह दी।
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