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हल्द्वानी। लंबे समय से दिमाग में डाकिया की वही पुरानी छवि बनी हुई है। सिर पर टोपी, कंधे पर झोला और साइकिल पर आती उम्मीदों की डाक। मगर अब भारतीय डाक विभाग इस छवि को बदलने जा रहा है।

इसके तहत हल्द्वानी में 30 जून से शुरू होने जा रही इंटीग्रेटेड डिलीवरी सेंटर सेवा के साथ डाकियों को नई पहचान मिलने जा रही है। इसके तहत अब वे झोले और साइकिल की जगह आधुनिक टू-व्हीलर वाहन से लोगों तक उनकी जरूरी डाक, रजिस्ट्री और पार्सल पहुंचाएंगे।

यह सेवा कुमाऊं मंडल के हल्द्वानी, काशीपुर और रुद्रपुर में एक साथ शुरू हो रही है, जो प्रदेशभर में प्रस्तावित 20 इंटीग्रेटेड सेंटरों की योजना का हिस्सा है।

इन सेंटरों का उद्देश्य 15 किलोमीटर के दायरे में आने वाले सभी डाकघरों को एक मुख्य केंद्र से जोड़ना है। हल्द्वानी प्रधान डाकघर से रानीबाग, लामाचौड़, दमुवादूंगा जैसे इलाके इस योजना में शामिल हैं।

इस संबंध में सहायक डाक अधीक्षक प्रकाश पांडे ने बताया कि इससे डाक अब कई केंद्रों से होकर नहीं गुजरेगी, बल्कि एक ही स्थान से सीधे ग्राहकों तक पहुंचेगी। इससे समय की बचत होगी साथ ही डिलीवरी में सटीकता भी आएगी।

दरअसल शुरुआत में यह केंद्र प्रधान डाकघर से संचालित होगा, भविष्य में अलग भवन भी तैयार किया जाएगा। डाकिया को डिलीवरी के लिए पेट्रोल खर्च दिया जाएगा। जितनी दूरी वह तय करेगा, उसका हिसाब कर भुगतान किया जाएगा। हालांकि अभी सिर्फ पेट्रोल खर्च ही दिया जा रहा है, लेकिन भविष्य में बेहतर संसाधनों के साथ वाहन सेवा को और उन्नत किया जाएगा।

इस बारे में डाक अधीक्षक प्रकाश पांडे का कहना है कि इंटीग्रेटेड योजना में दोपहिया वाहनों से डाकिया को लैस करने का प्रस्ताव शामिल है। इससे उन्हें सहूलियत मिल सकेगी। साथ ही डाक भी समय से पते पर पहुंचेगी।  (हि.स.)
 


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