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नई दिल्ली। वर्ष 2006 में उत्तर प्रदेश के नोएडा के निठारी हत्याकांड के एक मामले में दोषी करार दिए गए सुरेंद्र कोली को बड़ी राहत दी है। सुरेंद्र कोली की जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। चीफ जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने कोली को एक मामले में उम्रकैद की सजा को रद्द कर दिया है। कोली 12 मामलों में पहले ही बरी हो चुका है।

उच्चतम न्यायालय ने 7 अक्टूबर को कोली की क्यूरेटिव याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि ये मामला एक मिनट में अनुमति देने वाला है। अगर इस मामले में बाकी मामलों में बरी होने के बाद भी उसे दोषी ठहराया जाए तो एक अजीब स्थिति पैदा हो जाएगी। क्या यह न्याय का उपहास नहीं होगा। सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा था कि दोषसिद्धि बयान और रसोई के चाकू की बरामदगी पर आधारित है। क्या यह संभव है कि रसोई के चाकू से हड्डियां काटी जाएं।

30 जुलाई को कोर्ट ने कोली और मनिंदर सिंह पंढेर को बरी करने के आदेश को चुनौती देने वाली 14 याचिकाओं को खारिज कर दिया था। उच्चतम न्यायालय ने पंढेर को सभी मामलों में बरी कर दिया था जबकि कोली एक लंबित मामले में जेल में बंद है। इस मामले में एक पीड़िता के पिता, सीबीआई और उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 16 अक्टूबर 2023 को सुरेंद्र कोली को बरी करने का आदेश दिया था। इसके पहले ट्रायल कोर्ट ने 28 सितंबर 2010 को सुरेंद्र कोली को मौत की सजा दी थी।

इस मामले में सुनवाई के दौरान सुरेंद्र कोली के वकील ने उच्चतम न्यायालय में दलील देते हुए कहा था कि उसके खिलाफ साक्ष्य के नाम पर केवल कबूलनामा है जो उसकी पुलिस हिरासत के काफी दिन के बाद दर्ज किया गया था। (हि.स.)


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