पटना। अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव विपक्ष एकजुट होता नजर आ रहा है। यह चुनाव भाजपा के लिए आसान नहीं हैं। विपक्षी नेता अक्सर रैलियों, सम्मेलनों और जन्मदिन पार्टियों में एकता का प्रदर्शन करते रहते हैं। यह पटना में भाकपा माले के अधिवेशन, पूर्णिया और चेन्नई में महागठबंधन की रैली के दौरान हुआ, जब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने अपना 70वां जन्मदिन कांग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ मनाया।
अगला चुनाव विपक्ष पार्टियों के लिए अहम
अगले साल होने वाला आम चुनाव सभी विपक्षी पार्टियों के लिए अहम है। उनके नेता पहले से ही दावा कर रहे हैं कि अगर केंद्र में बीजेपी की सत्ता बनी रही तो देश का संविधान गंभीर खतरे में आ जाएगा। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके डिप्टी तेजस्वी यादव भी इस तथ्य को जानते हैं और इसलिए वे विपक्षी नेताओं को एकजुट करने का कोई अवसर नहीं खो रहे हैं।
नीतीश ने की थी विपक्ष एकजुटता की पहल
हाल ही में पटना में आयोजित भाकपा माले के 11वें राष्ट्रीय अधिवेशन में नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव ने कांग्रेस नेतृत्व से विपक्षी दलों को एकजुट करने की पहल करने की अपील की थी। नीतीश कुमार ने कांग्रेस के सलमान खुर्शीद से कहा कि वह अपना संदेश कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचा दें। उन्होंने यह भी कहा कि वह कांग्रेस पार्टी के एक कॉल का इंतजार कर रहे हैं।
तेजस्वी यादव ने की विपक्षी एकता की वकालत
इसी कार्यक्रम के दौरान तेजस्वी यादव ने कांग्रेस पार्टी के साथ विपक्षी एकता की भी वकालत की। उन्होंने कांग्रेस से अपील की कि वह क्षेत्रीय दलों को चालक की सीट पर रहने की अनुमति दे, जहां वे मजबूत स्थिति में हैं। खुर्शीद ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वे उसी तरफ हैं और हर कोई इस बात का इंतजार कर रहा है कि कौन पहले 'आई लव यू' कहेगा।
महागठबंधन के लिए अखिलेश भी साथ आए
25 फरवरी को पूर्णिया की रैली में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने आश्वासन दिया कि उनकी पार्टी बिहार में महागठबंधन के साथ है और विपक्षी एकता की पक्षधर है। सिंह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन छत्तीसगढ़ में हुआ, लेकिन शीर्ष नेतृत्व महागठबंधन की एकता पर पैनी निगाह रखे हुए है। तिवारी ने कहा कि हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने पूर्णिया रैली को वर्चुअली संबोधित करते हुए ठीक ही कहा। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों का भाग्य देश में लोकतंत्र के बने रहने पर निर्भर करेगा। राजनेता राजनीति तभी करेंगे जब देश के लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा होगी।"
Read More: ICSE, ISC बोर्ड का रिजल्ट जारी, 10वीं में 98.18% तो 12वीं में 99% स्टूडेंट्स पास




