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नई दिल्ली। मणिपुर हिंसा पर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। । मानसून सत्र के सातवें दिन शुक्रवार को भी दोनों सदनों में जमकर हंगामा और नारेबाजी हुआ।विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव पर तुरंत चर्चा कराए जाने की मांग पर अड़ा हुआ है। हंगामे के चलते दोनों सदनों की कार्यवाही सोमवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

इससे पहले लोकसभा में सुबह 11 बजे कार्यवाही शुरू होते ही नारेबाजी शुरू हो गई। विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी ने अविश्वास प्रस्ताव पर तुरंत चर्चा की मांग की। स्पीकर ओम बिरला ने विपक्ष से कार्यवाही में हिस्सा लेने को कहा। उन्होंने कहा, 'आप सदन को चलने नहीं देना चाहते, प्रश्नकाल, जहां सरकार सवालों का जवाब देती है, बहुत जरूरी है।' इस पर विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि 10 मई 1978 को अविश्वास प्रस्ताव पेश होते ही उस पर बहस शुरू कर दी गई थी।

संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने चौधरी से कहा कि सब कुछ नियमानुसार हो रहा है। बहस 10 दिन के अंदर हो सकती है। हमारे पास नंबर हैं, अगर आपके पास हैं तो हमारे बिल को हराएं। हंगामा बढ़ने पर लोकसभा अध्यक्ष ने पहले दोपहर 12 बजे  तक फिर सोमवार सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।

उधर राज्यसभा में सभापति जगदीप धनखड़ और तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन के बीच विवाद की स्थिति बनी। डेरेक ओ'ब्रायन विपक्ष के 267 के तहत दिए गए प्रस्ताव पर दबाव डालने लगे।

डेरेक ने अपनी बात रखने के लिए मेज थपथपाई, जिसे धनखड़ ने नाटकीयता बताया, लेकिन उन्होंने अपनी बात जारी रखी। इसके बाद कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित हो गई। सदन की बैठक अब सोमवार, 31 जुलाई को सुबह 11 बजे से होगी।

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अविश्वास प्रस्ताव पर सरकार का समर्थन करेगी वाईएसआर कांग्रेस
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ मतदान करने का फैसला किया है। पार्टी के लोकसभा में 22 और राज्यसभा में 9 सदस्य हैं। वाईएसआर ने दिल्ली अध्यादेश पर भी सरकार का समर्थन करने को कहा है। पार्टी नेता विजयसाई रेड्डी का कहना है कि अविश्वास प्रस्ताव लाने से देश को कैसे मदद मिलेगी? मणिपुर और दो पड़ोसियों से बिगड़े रिश्तों के बीच सरकार को कमजोर करने की कोशिश करना देशहित में नहीं है।

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मणिपुर में दो महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाने के मामले में सुनवाई टली


नई दिल्ली। मणिपुर में दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने वाले वीडियो पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से स्वतः संज्ञान लेने के मामले में आज सुनवाई नहीं होगी। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के उपलब्ध नहीं होने के कारण सुनवाई टल गई।

इस मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है। केंद्र सरकार ने कहा है कि राज्य सरकार की सहमति लेकर जांच सीबीआई को ट्रांसफर की जा रही है। मुकदमे का तेज निपटारा जरूरी है। केंद्र ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट इस केस को राज्य से बाहर ट्रांसफर करने का आदेश दे और ट्रायल कोर्ट से कहे कि वह चार्जशीट के छह महीने के भीतर फैसला दे।

सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई को इस मामले पर स्वतः संज्ञान लिया था। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था कि हमें इन तस्वीरों से धक्का पहुंचा है। हिंसा प्रभावित क्षेत्र में महिलाओं को सामान की तरह इस्तेमाल किया गया। अगर राज्य सरकार कार्रवाई नहीं करेगी, तो हम करेंगे।

चीफ जस्टिस ने कहा था कि दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने वाला वीडियो परेशान करने वाला है। ये समय है जब सरकार वाकई में काम करे। ये अस्वीकार्य है। बेंच ने कहा था कि किसी महिला का इस्तेमाल सांप्रदायिक विभाजन बढ़ाने के लिए नहीं किया जा सकता है। ये मानवाधिकार का सीधा-सीधा उल्लंघन है। ये लोकतांत्रिक संविधान के लिए ठीक नहीं है।

 

 


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