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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया। हालांकि 5 अन्य आरोपियों को 12 शर्तों के साथ जमानत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उमर और शरजील एक साल तक इस मामले में जमानत याचिका दाखिल नहीं कर सकते हैं।

न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने जिन आरोपियों को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया, उनमें गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शादाब अहमद और मोहम्मद सलीम खान शामिल हैं। न्यायालय ने 10 दिसंबर, 2025 को जमानत याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। दिल्ली पुलिस ने आरोपियों की ओर से दाखिल जमानत याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा था कि आरोपियों ने साजिश रची थी कि देश की सत्ता को पलटा जाए। वे नेपाल और बांग्लादेश की तरह सत्ता के खिलाफ बगावत करना चाहते थे।

केंद्र सरकार की ओर से पेश एएसजी (अतिरिक्त महान्यायवादी) एसवी राजू ने कहा था कि आरोपियों के मन में संविधान के प्रति थोड़ा भी सम्मान नहीं बचा है और वे नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में डंडे, एसिड की बोतलें और आग्नेयास्त्र लेकर चलते थे। राजू ने कहा था कि आरोपियों को केवल इस आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती कि सुनवाई में देरी हो रही है। उन्होंने कहा था कि सुनवाई में देरी आरोपितों की वजह से हो रही है ना कि अभियोजन पक्ष की वजह से।

आरोपित उमर खालिद के वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि इस मामले में 751 एफआईआर दर्ज किए गए हैं। लेकिन उमर खालिद का नाम केवल एक एफआईआर में है। उसमें दिसंबर, 2022 में बरी कर दिया गया। एक दूसरा एफआईआर दर्ज किया गया है जिसमें साजिश का जिक्र है। सिब्बल ने कहा था कि 750 एफआईआर में उमर खालिद किसी में भी लिप्त नहीं है। 751 एफआईआर में 116 में ट्रायल किया गया जिसमें 97 में दोषी बरी कर दिए गए। 17 केसों में फर्जी दस्तावेजों को आधार बनाया गया है।


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