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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने 27 माह से ज्यादा के भ्रूण को हटाने की गुजरात की एक रेप पीड़िता की मांग पर सुनवाई करते हुए गुजरात हाई कोर्ट के रुख पर गंभीर आपत्ति जताई है।

शनिवार को विशेष सुनवाई के दौरान जस्टिस बीवी नागरत्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि इस मामले पर मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट 11 अगस्त को मिल गई, इसके बावजूद मामले की सुनवाई 23 अगस्त के लिए हाई कोर्ट ने लिस्ट किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट को इसमें जल्दबाजी दिखानी चाहिए थी, उसके बावजूद 12 दिन बाद इसे लिस्ट करने का आदेश दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने रेप पीड़िता का दोबारा मेडिकल परीक्षण कराने का आदेश दिया।

दरअसल, रेप पीड़िता ने 7 अगस्त को अपना भ्रूण हटाने की अनुमति मांगी थी। उस समय भ्रूण 26 हफ्ते का था। 8 अगस्त को गुजरात हाई कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड का गठन कर 11 अगस्त तक रिपोर्ट तलब की थी। 11 अगस्त को मेडिकल रिपोर्ट मिलने के बाद इस मामले की अगली सुनवाई 23 अगस्त तय की गई। इस बीच 17 अगस्त को हाई कोर्ट ने भ्रूण हटाने की याचिका खारिज कर दी लेकिन अभी तक खारिज करने संबंधी विस्तृत आदेश अपलोड नहीं किया। उसके बाद याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में कहा गया है कि 11 अगस्त को मिली मेडिकल रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर भ्रूण हटाया जाता है तो रेप पीड़िता को कोई नुकसान नहीं होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चूंकि हाई कोर्ट का आदेश उसके पास नहीं है, इसलिए रेप पीड़िता का दोबारा मेडिकल परीक्षण कराने का आदेश दिया जाता है। रेप पीड़िता का मेडिकल परीक्षण आज ही किया जाएगा। मेडिकल परीक्षण रिपोर्ट कल यानी 20 अगस्त तक कोर्ट में दाखिल की जाए। मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त को होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये आश्चर्यजनक है कि मेडिकल रिपोर्ट मिलने के बावजूद 12 दिनों के बाद लिस्ट करने का आदेश दिया जाता है। 17 अगस्त को याचिका खारिज करने का आदेश भी अभी तक अपलोड नहीं किया जाना आश्चर्यजनक है। ऐसे मामलों में जब याचिका का निपटारा जल्द होना चाहिए, गुजरात हाई कोर्ट का रवैया हैरान करने वाला है। सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया कि वो गुजरात हाई कोर्ट की रजिस्ट्री से पता कर बताएं कि आदेश अपलोड हुआ है कि नहीं।

 


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