नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि किसानों, मछुआरों और पशुपालकों का हित भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इन वर्गों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए वे व्यक्तिगत रूप से कोई भी कीमत चुकाने को तैयार हैं। उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत अपने अन्नदाताओं के साथ कभी कोई समझौता नहीं करेगा।
बता दें कि पीएम मोदी के इस बयान को ट्रम्प के दोगुने टैरिफ के ऐलान से जोड़कर देखा जा रहा है। भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले सामानों पर आज यानी 7 अगस्त से 25% टैरिफ लगेगा। वहीं 25% एक्स्ट्रा टैरिफ 27 अगस्त से लागू होगा। इससे भारतीय सामान अमेरिकी बाजार में महंगे हो जाएंगे। उनकी मांग कम हो सकती है। वहां के इंपोर्टर्स अन्य देशों से सामान मंगा सकते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को आईसीएआर पूसा में आयोजित "एम.एस. स्वामीनाथन शताब्दी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन" को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने भारत में कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर और टिकाऊ बनाने की दिशा में प्रोफेसर स्वामीनाथन के योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि डॉ. स्वामीनाथन ने यह दिखाया कि विज्ञान केवल खोज नहीं बल्कि वितरण का भी माध्यम होना चाहिए। उन्होंने अपने शोध के माध्यम से किसानों को खेती के आधुनिक तरीकों के लिए प्रेरित किया। उनके विचार आज भी हमारी नीतियों और कृषि विज्ञान में परिलक्षित होते हैं।
मोदी ने कहा कि हरित क्रांति के जनक माने जाने वाले डॉ. स्वामीनाथन का योगदान केवल कृषि उत्पादन तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने बायोडायवर्सिटी और बायो-हैप्पीनेस जैसे विचारों के माध्यम से स्थानीय समुदायों को भी सशक्त बनाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि डॉ. स्वामीनाथन मानते थे कि बायोडायवर्सिटी के जरिए स्थानीय लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि डॉ. स्वामीनाथन की स्मृति में “एमएस स्वामीनाथन अवॉर्ड फॉर फूड एंड पीस” की शुरुआत की गई है, जो विकासशील देशों के उन वैज्ञानिकों को दिया जाएगा जिन्होंने खाद्य सुरक्षा की दिशा में उल्लेखनीय योगदान दिया है। इस पुरस्कार के पहले विजेता नाइजीरिया के प्रोफेसर बने हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आज चावल, गेहूं, कपास, सब्जियां और मछली उत्पादन में दुनिया में शीर्ष स्थानों पर है। उन्होंने कहा, “सोयाबीन, मूंगफली और सरसों जैसी फसलों का उत्पादन भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा है। यह हमारे किसानों की मेहनत और सरकार की किसान-केंद्रित नीतियों का परिणाम है।” (हि.स.)
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