धर्म डेस्क। सावन मास का प्रत्येक मंगलवार 'मां मंगला गौरी' को समर्पित होता है। आज, यानी 4 अगस्त को सावन का मंगलवार होने के कारण देश भर में सुहागिन महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य और सुख-समृद्धि के लिए मंगला गौरी का व्रत रख रही हैं। जाने-अनजाने में की गई छोटी सी भूल व्रत के पुण्य को क्षीण कर सकती है। आइए जानते मंगला गौरी व्रत के पूजा की सही विधि
मंगला गौरी व्रत की सही पूजा विधि
1- सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और स्वच्छ (लाल या हरे) वस्त्र धारण करके व्रत का संकल्प लें।
2- घर के मंदिर में या पूजा स्थल पर एक लाल कपड़ा बिछाकर मां मंगला गौरी (माता पार्वती) और भगवान शिव की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
3- मां गौरी को 16 की संख्या में चीजें चढ़ाने का विशेष महत्व है—जैसे 16 चूड़ियां, 16 लौंग, 16 इलायची, 16 सुपारी, 16 बेलपत्र और 16 प्रकार के फूल/फल।
4- मंगला गौरी व्रत कथा का पाठ करें अथवा सुनें। इसके बाद धूप-दीप जलाकर कपूर से मां गौरी की आरती उतारें और परिवार के साथ प्रसाद वितरित करें।
ये गलतियां भूलकर न करें
1- मंगला गौरी व्रत के दिन सुहागिन महिलाओं व कन्याओं को भूलकर भी काले, नीले, स्लेटी या गहरे भूरे रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए। पूजा के समय लाल या हरे रंग की साड़ी अथवा वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना गया है, क्योंकि ये रंग मां पार्वती को अति प्रिय हैं।
2- व्रत के पुण्य फल के लिए व्रती को मन, वचन और कर्म की शुद्धता बनाए रखना होता है। मंगला गौरी व्रत के दिन महिलाओं को अपने मन में किसी के प्रति ईर्ष्या, द्वेष या क्रोध नहीं लाना चाहिए। आज के दिन अपने पति, सास-ससुर, बुजुर्गों या किसी भी व्यक्ति का अपमान करने से बचें। घर में क्लेश या वाद-विवाद करने से पूजा का फल निष्फल हो जाता है और नकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
3- मां मंगला गौरी की पूजा में सामग्री की शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है। पूजा में कभी भी टूटे हुए चावल (खंडित अक्षत), बासी फूल या कटे-फटे बेलपत्र अर्पित न करें। इसके अलावा, मां गौरी और भगवान शिव की पूजा में केतकी के फूल, तुलसी पत्र या हल्दी (विशेष रूप से केवल शिवलिंग पर सीधे अर्पित करना) के नियमों का ध्यान रखें।
4- पूजा के पश्चात यह सुहाग सामग्री किसी योग्य ब्राह्मणी या सुहागिन महिला को आदरपूर्वक दान की जाती है। कभी भी अपनी इस्तेमाल की हुई पुरानी या टूटी-फूटी श्रृंगार सामग्री का दान न करें। सुहाग की वस्तुएं हमेशा नई और स्वच्छ होनी चाहिए। मां पार्वती को अर्पित सिंदूर को अपने माथे पर लगाना न भूलें, यह अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद देता है।
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