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धर्म डेस्क। हरतालिका तीज का व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 26 अगस्त को मनाया जाएगा। सुहागिन महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। मान्यता है कि यह व्रत पति की लंबी आयु, दांपत्य सुख और अखंड सौभाग्य का वरदान प्रदान करता है।

हरतालिका तीज पर बन रहा अद्भुत संयोग

इस बार रवि योग, भौम जया सिद्ध योग और लक्ष्मी योग का संयोग बन रहा है। यह व्रत सौभाग्यती महिलाएं अपने सौभाग्य को अक्षुण्ण बनाए रखने और कुंवारी कन्याएं अपने भावी जीवन साथी एवं सुखी दांपत्य को प्राप्त करने के लिए करेंगी। हरतालिका तीज में भगवान शिव, माता गौरी और गणेशजी की पूजा का विशेष महत्व है।

शुभ मुहूर्त

रांची के आचार्य मनोज पांडेय ने मंगलवार को बताया कि तृतीया तिथि 25 अगस्त सोमवार को प्रातः 11.39 बजे से प्रारंभ होगी और 26 अगस्त मंगलवार को प्रातः 12.39 बजे समाप्त होगी। हस्त नक्षत्र 26 को दिन भर रहेगा। इसलिए 26 को सूर्योदय में तृतीया होने से इस दिन पूरे दिन तृतीया मान्य होगा। हरतालिका व्रत भाद्रपद के शुक्ल पक्ष के तृतीय तिथि हस्त नक्षत्र में किया जाता है। मान्यता है कि यह व्रत माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए रखा था। भगवान शिव और पार्वती के विवाह की कथा सुनने का काफी महत्व है।

 पूजा की विधि

आचार्य ने बताया कि हरतालिका तीज व्रत प्रदोषकाल में किया जाता है। सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त को प्रदोषकाल कहा जाता है। इसमें दिन और रात के मिलन का समय होता है। इस व्रत को पूरे दिन और रात निर्जला रहकर किया जाता है। सुहागिन महिलाएं शिवालय जाकर माता पार्वती और शिवजी और गणेश की पूजा करती हैं, जो सुहागिन मंदिर नहीं जा सकती हैं, वे घर में ही मिट्टी या रेत की भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा बनाकर पूजन करेंगी। पूजा स्थल को बेलपत्र के झालर, रंगोली और फूलों से सजाए तथा माता पार्वती का श्रृंगार करें। इसके बाद देवताओं का आह्वान करते हुए भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश का षोडशोपचार विधि से पूजन करें।
 


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