- प्रधानमंत्री मोदी ने ब्राजील को जी20 की अध्यक्षता सौंपी, सुरक्षा परिषद में बदलाव की जरूरत पर दिया जोर
नई दिल्ली। जी20 समिट के आखिरी दिन रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी20 की अध्यक्षता ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा को सौंप दी। इसके साथ ही पीएम मोदी ने समिट के समापन का ऐलान किया। ब्राजील अगले साल होने वाली जी20 समिट का आयोजन करेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने संस्कृत भाषा में कहा- स्वस्ति अस्तु विश्वस्य! यानी संपूर्ण विश्व में आशा और शांति का संचार हो।
समिट के आखिरी सेशन के बाद पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया बदल रही है इसके साथ दुनिया के संस्थानों को भी बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यूएनएससी में अभी तक उतने ही सदस्य हैं जितने इसकी स्थापना के वक्त थे। स्थायी देशों की संख्या बढ़नी चाहिए। इसके बाद ब्राजील के राष्ट्रपति ने कहा कि गरीब देशों की कर्ज की समस्या पर ध्यान देना होगा। दुनिया को भुखमरी खत्म करने की कोशिश बढ़ानी होगी।

प्रधानमंत्री ने देशों के बीच हितों के जुड़ाव से आगे ह्रदयों के जुड़ाव पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे हम ग्लोबल विलेज को ग्लोबल फैमिली बनते देखेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान जिम्मेदार मानव केन्द्रित एआई व्यवस्था के लिए फ्रेमवर्क तैयार करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि न्यू जेनेरेशन टेक्नोलॉजी में अकल्पनीय स्केल और स्पीड के गवाह बन रहे हैं। ऐसे में हमें 2019 मे बने जी-20 के एआई से जुड़े मानकों से एक कदम आगे बढ़ना होगा। भारत चाहता है कि सामाजिक आर्थिक विकास, ग्लोबल कार्यबल और शोध एवं विकास जैसे क्षेत्रों में सभी देशों को एआई का लाभ मिले।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देशों की सुरक्षा और संवेदनशील मुद्दों का ध्यान रखने पर ही एक भविष्य का भाव सशक्त होगा। ऐसे में साइबर जगत से आतंकवाद को फंडिंग जैसे मुद्दों पर जल्द से जल्द ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि साइबर सिक्योरिटी और क्रिप्टो करेंसी की चुनौतियों से हम परिचित हैं।
उन्होंने कहा कि क्रिप्टो करेंसी का क्षेत्र, सामाजिक व्यवस्था, मौद्रिक और वित्तीय स्थिरता, सबके लिए एक नया विषय बनकर उभरा है। इसलिए हमें क्रिप्टो करेंसी को रेगुलेट करने के लिए ग्लोबल स्टैंडर्ड्स डेवलपमेंट करने होंगे। बैंक विनियमन पर हमारे सामने बेसल मानक एक मॉडल के रूप में है। इस दौरान प्रधानमंत्री ने जीडीपी सेंट्रिक अप्रोच के बजाय मानव केन्द्रित विजन पर ध्यान आकर्षित कराया।
भुखमरी के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे: लूला डा सिल्वा
नई दिल्ली। जी20अध्यक्षता मिलने के बाद ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा ने कहा- आज महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देते वक्त मैं काफी भावुक हो गया था। सब जानते हैं कि मेरे राजनीतिक जीवन में महात्मा गांधी का कितना महत्व है। उन्होंने कहा कि ब्राजील की प्रेसिडेंसी की 3 प्राथमिकताएं होंगी। 1) सामाजिक न्याय और भुखमरी के खिलाफ लड़ाई, 2) सस्टेनेबल डेवलपमेंट, 3) दुनिया के संस्थानों में बदलाव।
जी-20 समिट के वर्चुअल सेशन का प्रस्ताव
नई दिल्ली। ब्राजील लूला डा सिल्वा को अध्यक्षता सौंपते वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- दो दिनों में, आप सभी ने अनेक बातें यहां रखी हैं, सुझाव दिए हैं, बहुत सारे प्रस्ताव रखे हैं। हमारी ये जिम्मेदारी है कि जो सुझाव आए हैं, उनको भी एक बार फिर देखा जाए कि उनकी प्रगति में गति कैसे लाई जा सकती है। मेरा प्रस्ताव है कि हम नवंबर के अंत में जी-20 समिट का एक वर्चुअल सेशन और रखें। उस सेशन में हम इस समिट के दौरान तय विषयों की समीक्षा कर सकते हैं।
घोषणापत्र पर लगी औचारिक मुहर
नई दिल्ली। जी-20 समिट के तीसरे सेशन के दौरान नई दिल्ली घोषणा पत्र पर औपचारिक मुहर लगाई गई। शिखर सम्मेलन शुरू होने से ठीक पहले ब्राजील और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ने पीएम मोदी को पौधे भेंट किए। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन वियतनाम दौरे के लिए रवाना हो गए
ऋषि सुनक ने पत्नी संग अक्षरधाम मंदिर में की पूजा
नई दिल्ली। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक अपनी पत्नी अक्षता मूर्ति के साथ आज (10 सितंबर) दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर पहुंचे। स्वामीनारायण मंदिर के मुख्य पुजारी ने दोनों का स्वागत किया और फिर उन्हें मुख्य मंदिर में ले जाकर पूजा करवाई। ऋषि और उनकी पत्नी 45 मिनट मंदिर में रहे। उन्होंने मुख्य मंदिर के पीछे स्थित एक और मंदिर में जलाभिषेक किया। उनकी सुरक्षा को लेकर मंदिर के अंदर और बाहर कड़े इंतजाम किए गए थे।
राष्ट्राध्यक्षों ने राजघाट पहुंचकर दी महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि
नई दिल्ली। भारत की मेजबानी चल रहे जी-20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने आए राष्ट्राध्यक्षों, वरिष्ठ अधिकारियों और वैश्विक संगठनों के प्रमुखों ने रविवार सुबह राजघाट पहुंचकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी का विनम्रता पूर्वक अभिवादन किया।
अब तक राजघाट पहुंचने वालों में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष चार्ल्स मिशेल, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीस, नाइजीरिया के राष्ट्रपति बोला अहमद टीनुबू, कोमोरोस संघ के राष्ट्रपति और अफ्रीकी संघ के अध्यक्ष अजाली असौमानी अर्जेंटीना के राष्ट्रपति अल्बर्टो फर्नांडीज, स्पेन की उप राष्ट्रपति नादिया कैल्विनो, सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सीन लूंग, नीदरलैंड के प्रधानमंत्री मार्क रूट, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना, मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद कुमार जुगनाथ, ओमान के उप प्रधानमंत्री असद बिन तारिक बिन तैमूर अल सैद, विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस एडनोम,अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा, एशियाई विकास बैंक के अध्यक्ष मासात्सुगु असकावा, जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यूं सुक येओल, पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के प्रधानमंत्री ली कियांग,रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव, तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप एर्दोगन और इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी शामिल हैं।
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