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धर्म डेस्क।  Pitru Paksha 2024: पूर्वजों की आत्मा को शांति प्रदान करने के लिए अश्विन मास में आने वाले पितृपक्ष में श्राद्ध और तर्पण किया जाता है. मान्यता है कि इससे उन्हें भोजन और जल मिलता है और आत्मा को शांति मिलती है. जिससे पूर्वज परिवारजनों पर अपनी कृपा बरसाते हैं।

आपने हमेशा पुरुषों को ही श्राद्ध या तर्पण करते हुए देखा होगा लेकिन कई बार मन में प्रश्न उठता है कि क्या स्त्रियां भी यह कार्य कर सकती हैं? इसका जवाब है हां. विद्वानों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति के परिवार में पितृकुल या मातृकुल में कोई भी पुरुष है ही नहीं तो ऐसी स्थि​ति में घर ​की स्त्रियां भी श्राद्ध कर सकती र्हैं।

आपको बता दें कि श्राद्ध की परंपरा रामायण और महाभारत काल से चली आ रही है. ग्रंथों के अनुसार, रामायण में भगवान राम ने अपने पिता दशरथ और महाभारत में पांडवों ने अपने पितरों का श्राद्ध किया था. 

इन बातों का रखें ध्यान 

श्राद्ध, पिंडदान जैसे अनुष्‍ठान करते समय महिलाओं को कुछ बातों का ध्‍यान रखना जरूरी है कि जैसे वे इस समय सफेद या पीले रंग के ही कपड़े पहनें. इसके अलावा बेहतर होता है कि विवाहित महिलाएं ही श्राद्ध करें. पितृ तर्पण करते समय महिलाओं को यह ध्‍यान रखना चाहिए कि वे जल में कुश और काले तिल डालकर तर्पण ना करें. क्‍योंकि इसकी मनाही की गई है.

 

 


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