नई दिल्ली। दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली आबकारी घोटाला मामले के आरोपित और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की नियमित एवं अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया है। स्पेशल जज कावेरी बावेजा ने 5 जून को फैसला सुनाने का आदेश दिया।
कोर्ट के इस फैसले का मतलब है कि केजरीवाल को 2 जून को सरेंडर करना होगा। ईडी की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एएसजी एसवी राजू मौजूद थे। केजरीवाल की ओर से वरिष्ठ वकील एन हरिहरन मौजूद थे। सुनवाई शुरू होते ही तुषार मेहता ने कहा कि क्या केजरीवाल सरेंडर करेंगे। केजरीवाल ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि वे 2 जून को खुद 3 बजे सरेंडर करेंगे। केजरीवाल ने अपने प्रेस कांफ्रेंस में गुमराह करने की कोशिश की है। वे खुद सरेंडर नहीं कर रहे हैं, वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक सरेंडर कर रहे हैं।
राजू ने कहा कि केजरीवाल के सरेंडर नहीं करने की मांग सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 2 जून को सरेंडर करने को कहा है। ऐसे में अंतरिम जमानत की याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। राजू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत एक जून तक की दी है। सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को नियमित जमानत दाखिल करने की छूट दी है।
राजू ने कहा कि उनकी नियमित जमानत याचिका भी सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि कानून के मुताबिक वे अभी हिरासत में नहीं हैं। हिरासत में होने के बाद ही नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई की जा सकती है। राजू ने कहा कि केजरीवाल की नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई तभी की जा सकती है जब वो हिरासत में हों। ऐसे में अगर केजरीवाल सरेंडर करते हैं तभी नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई हो सकती है।
राजू ने कहा कि अंतरिम जमानत हो या नियमित जमानत उसके लिए मनी लॉन्ड्रिंग कानून की धारा 45 की प्रक्रिया का पालन होना चाहिए। ऐसे में अंतरिम जमानत और नियमित जमानत याचिका दोनों सुनवाई योग्य नहीं है। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट जैसे संवैधानिक कोर्ट को संविधान के अनुच्छेद 42 के तहत विशेष अधिकार है लेकिन ट्रायल कोर्ट के विशेष अधिकार नहीं है कि वो इन याचिकाओं पर सुनवाई कर सके।
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