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धर्म डेस्क। Maa Kushmanda puja method आज शारदीय नवरात्र का चौथा दिन है। इस दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। मां कूष्मांडा (Maa Kushmanda) को सौरमंडल की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। मान्यता है कि नवरात्र के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा करने वालों को रोग और दोषों से मुक्ति मिलती है. कहते हैं मां कूष्मांडा जिस पर प्रसन्न हो जाएं उसे अष्ट सिद्धियां और निधियां प्राप्त हो जाती है. आइए जानते हैं मां कूष्मांडा की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र और उपाय.

 मां कूष्मांडा की पूजन विधि

नवरात्रि के चौथे दिन प्रातः स्नान आदि के बाद हरे रंग के वस्त्र पहने. इस दिन कुम्हड़े की बलि देकर माता को अर्पित करना चाहिए. कुम्हड़ा वो फल है जिससे पेठा बनता है. माता को मेहंदी, चंदन, हरी चूड़ी, चढ़ाएं. देवी कूष्मांडा का प्रिय भोग मालपुआ है. लंबे वक्त से अगर कोई घर में बीमार है या आए दिन बीमारियों का डेरा रहता है तो माता कूष्मांडा के बीज मंत्र का 108 बार जाप या देवी कवच का पाठ करें. माता की कथा सुनें. मान्यता है इससे असाध्य रोग भी खत्म हो जाते हैं.

मां कूष्मांडा मंत्र

बीज मंत्र: कूष्मांडा: ऐं ह्री देव्यै नम:

पूजा मंत्र: ऊं कूष्माण्डायै नम:

ध्यान मंत्र: वन्दे वांछित कामर्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्। सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्वनीम्॥

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मां कूष्मांडा का स्तोत्र

वन्दे वांछित कामर्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्।

सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्वनीम्॥

भास्वर भानु निभां अनाहत स्थितां चतुर्थ दुर्गा त्रिनेत्राम्।

कमण्डलु, चाप, बाण, पदमसुधाकलश, चक्र, गदा, जपवटीधराम्॥

पटाम्बर परिधानां कमनीयां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।

मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल, मण्डिताम्॥

प्रफुल्ल वदनांचारू चिबुकां कांत कपोलां तुंग कुचाम्।

कोमलांगी स्मेरमुखी श्रीकंटि निम्ननाभि नितम्बनीम्॥


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