तिरुवनंतपुरम/ नई दिल्ली। केरल में निपाह वायरस ने सरकार और नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है। इस बीच केरल के स्वास्थ्य मंत्री कार्यालय ने कोझिकोड के एक अस्पताल में एक और निपाह वायरस संक्रमित व्यक्ति के पहुंचने की पुष्टि की है। इसकी उम्र 39 साल है। केरल में निपाह के फैलने से कर्नाटक ने अपने यहां चौकसी बढ़ा दी है।

कोझिकोड जिला प्रशासन ने शिक्षण संस्थानों और कोचिंग सेंटर्स में 16 सितंबर तक अवकाश घोषित किया है। विश्वविद्यालय के परीक्षा कार्यक्रम में कोई फेरबदल नहीं किया गया है। निपाह संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए उपलब्ध एकमात्र प्रायोगिक इलाज ‘मोनोक्लोनल एंटीबाडी’ को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) ने राज्य में पहुंचा दिया है।
अब तक दो लोगों की मौत
कोझिकोड में निपाह से दो लोगों की मौत हो चुकी है और तीन अन्य संक्रमित हैं। इममें शामिल नौ वर्षीय बच्चे की स्थिति गंभीर है। कोझिकोड में निपाह संक्रमित छह लोग मिल चुके हैं।
क्या है निपाह वायरस
उल्लेखनीय है निपाह वायरस पशुओं के जरिए मनुष्य में फैलता है। इसका पहला मरीज मलेशिया में 1999 में मिला था। इसके बाद सिंगापुर और बांग्लादेश में भी इस वायरस से दहशत रही। यह वायरस चमगादड़ और सूअर के जरिए इंसान के शरीर में पहुंचता है। अगर इस वायरस से संक्रमित कोई चमगादड़ या सूअर किसी फल को काटकर छोड़ देता है और उसे यदि मनुष्य खा ले तो वह निपाह की जद में आ जाता है। अगर किसी शख्स की निपाह वायरस की वजह से जान गई, तो उस परिवार के दूसरे सदस्य भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। निपाह संक्रमित व्यक्ति का अंतिम संस्कार करते समय जरूरत से ज्यादा सावधानी बरतनी होती है।
निपाह वायरस के लक्षण
तेज बुखार, सिरदर्द, सांस लेने में तकलीफ, गले में खराश, एटिपिकल निमोनिया जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. वहीं अगर स्थिति ज्यादा गंभीर रही तो इंसान इन्सेफेलाइटिस का भी शिकार हो सकता है और 24 से 48 घंटे में कोमा में जा सकता है। निपाह वायरस के लक्षण 5 से 14 दिन के भीतर दिख सकते हैं, लेकिन कुछ मामलों में ये 45 दिनों तक खिंच सकता है. ये वायरस से जुड़ा सबसे खतरनाक पहलू है.
सावधानी ही है उपचार
निपाह का पहला मामला 1999 में सामने आया था, लेकिन अब तक ना तो उसके इलाज की कोई दवा है न इसकी रोकथाम के लिए कोई वैक्सीन बन पाई है. अभी निपाह का इलाज सिर्फ सावधानी बरतना ही माना जा रहा है. अगर कुछ बातों का ध्यान रखा जाए, तो इस वायरस की चपेट में आने से बचा जा सकता है. चमगादड़ और सूअर के संपर्क में आने से बचें, जमीन या फिर सीधे पेड़ से गिरे फल ना खाएं, मास्क लगाकर रखें और समय-समय पर हाथ धोते रहें.
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