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पुणे। Narendra Dabholkar Murder Case: अंधविश्वास के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के प्रमुख नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के मामले मेें शुक्रवार को बड़ा फैसला आ गया। पुणे की CBI की स्पेशल कोर्ट ने आरोपी सचिन अंदुरे और शरद कलस्कर को दोषी करार दिया। कोर्ट ने दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

हत्याकांड का मास्टर माइंड माने जा रहे डॉक्टर विरेंद्र सिंह तावड़े के अलावा विक्रम भावे और संजीव पुनालेकर को कोर्ट ने बरी कर दिया है। हत्याकांड में कुल 5 आरोपी थे। इनमें तावड़े, अंदुरे और कलस्कर जेल में हैं, जबकि पुनालेकर और भावे जमानत पर बाहर हैं।

वीरेंद्र तावड़े पर हत्या की ​​साजिश रचने का आरोप था। हालांकि, सरकारी पक्ष की ओर से उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत पेश नहीं किया जा सका। तावड़े के अलावा अन्य दो आरोपियों के खिलाफ भी आरोप साबित नहीं हो सके।

दाभोलकर की हत्या के बाद अगले चार साल में तीन अन्य कार्यकर्ताओं की हत्याएं हुई थी। फरवरी 2015 में कम्युनिस्ट नेता गोविंद पानसरे और उसी साल अगस्त में कन्नड़ स्कॉलर और लेखक एमएम कलबुर्गी की कोल्हापुर में गोली मारकर हत्या की गई थी।

इसके बाद सितंबर 2017 में पत्रकार गौरी लंकेश की बेंगलुरु में उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह शक था कि इन चार मामलों में अपराधी एक-दूसरे से जुड़े हुए थे।


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