वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में गुरुवार शाम कांग्रेस ने शहर की जमीनी समस्याओं को उजागर करने का हवाला देकर 'पोल–खोल पदयात्रा' निकाली। इस दौरान जलभराव, टूटी सड़कें और प्रभावित दुकानदारों की समस्याओं को लेकर सरकार को घेरा। पदयात्रा के दौरान मुख्य सड़क पर यातायात बाधित करने के आरोप में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय समेत 60 कार्यकर्ताओं के खिलाफ सिगरा थाने में देर रात एफआईआर दर्ज की गई।
काशी विद्यापीठ चौकी प्रभारी विकल शांडिल्य की तहरीर पर यह मुकदमा दर्ज हुआ है। जिन नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है, उनमें कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेश्वर पटेल, राघवेंद्र चौबे, धर्मेंद्र तिवारी, फसाहत हुसैन, प्रमोद पांडेय, गुलशन अली, शतनाम सिंह, अशोक सिंह, अकील अंसारी सहित 50 अज्ञात कार्यकर्ता शामिल हैं।
प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि काशी में जो विकास दिखाया जा रहा है, वह पूरी तरह दिखावटी और ‘फर्जी’ है। उन्होंने भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि, “डबल इंजन की सरकार ने काशी को बर्बादी के रास्ते पर ला खड़ा किया है। मोदी-योगी सरकार को फर्जी विकास का ढिंढोरा पीटना बंद करना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि नाइट मार्केट परियोजना और रोपवे निर्माण के नाम पर व्यापारियों को उजाड़ा गया। न तो सरकार को नालों की जानकारी है और न ही सड़क की स्थिति की। गिरजाघर से गोदौलिया तक आम जनजीवन अस्त-व्यस्त है। दुकानदारों की रोज़ी-रोटी छिन गई है । एफआईआर दर्ज होने के बाद कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाया और विरोध जताया। उन्होंने इसे जनता की आवाज़ दबाने की साजिश करार दिया। (हि.स.)




