धर्म डेस्क। Nag Panchami 2025 देश में आज यानी 29 जुलाई दिन मंगलवार को नाग पंचमी (Nag Panchami 2025) का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को हर साल नाग पंचमी मनाई जाती है । इस दिन नाग देवता की पूजा विशेष विधि-विधान से की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन सर्पों की आराधना करने से जीवन में आने वाले संकटों से रक्षा होती है और कुंडली में मौजूद कालसर्प दोष का प्रभाव भी कम होता है। यह पर्व सुख, शांति और समृद्धि की कामना के साथ श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है। आइए जानते हैं इस दिन की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त के बारे में विस्तार से।
नाग पंचमी 2025 शुभ मुहूर्त
प्रातः 5:41 मिनट से प्रातः 8:23 मिनट तक
नाग पंचमी पर्व का महत्व
नाग पंचमी को लेकर कई प्राचीन पुराणों में कहानियां मिलती हैं, लेकिन सबसे प्रसिद्द कथा महाभारत काल की है। उस समय राजा जनमेजय ने अपने पिता की हत्या का बदला लेने के लिए नागों का संहार करने हेतु सर्प यज्ञ किया था। इस यज्ञ से नागों का विनाश होने लगा, तब उनकी मां उत्तरा की विनती पर आस्तिक मुनि ने नागों की रक्षा की। तभी से नागों का सम्मान करने और उनकी रक्षा के लिए नाग पंचमी का त्योहार मनाया जाने लगा। यह दिन नागों को श्रद्धा और सम्मान देने का प्रतीक है, जब भक्त सर्पों को जल, दूध और अन्य वस्तुएं अर्पित करते हैं। साथ ही यह पर्व विष और दुर्भावनाओं से जीवन की रक्षा की कामना का भी प्रतिनिधित्व करता है। भले ही इसे सांपों की पूजा का दिन कहा जाता है, पर असल में यह त्योहार प्रकृति और जीवन की सुरक्षा का संदेश देता है।
नाग पंचमी की पूजन विधि
-सबसे पहले, नाग पंचमी के दिन स्नान करके साफ-सुथरे और नए कपड़े पहनना चाहिए।
-इसके बाद घर के मुख्य द्वार या पूजा स्थल पर नाग देवता की तस्वीर या मिट्टी से बना हुआ चित्र स्थापित करें।
-फिर हल्दी, कुमकुम, अक्षत, दूध, जल, फूल और दूब से उनकी पूजा करें।
-पूजा के दौरान दूध में मिश्री या शहद मिलाकर नाग देवता को अर्पित करना शुभ माना जाता है।
-इसके बाद ॐ नमः नागाय या ॐ नागेन्द्राय नमः जैसे मंत्रों का जाप करना चाहिए।
-नाग पंचमी पर व्रत रखने की भी परंपरा है, खासकर विवाहित महिलाएं संतान सुख और परिवार की रक्षा के लिए यह उपवास रखती हैं।
-पूजा समाप्त होने के बाद घर के आसपास मौजूद सांपों को नुकसान पहुंचाने से बचना चाहिए।
-उनकी रक्षा के लिए दूध पिलाने की भी परंपरा निभाई जाती है, जिससे सर्प देवता की कृपा बनी रहती है।




