धर्म डेस्क। भगवान श्री राम का जन्मोत्सव यानी 'राम नवमी' (Ram Navami ) का पर्व बेहद खास होने वाली है। इस साल राम नवमी पर कई शुभ योगों का अद्भुत संगम बन रहा है, जिसे ज्योतिषीय दृष्टि से सुख-समृद्धि दायक माना जा रहा है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाए जाने वाले इस महापर्व पर श्रद्धालु न केवल व्रत रखते हैं, बल्कि घरों और मंदिरों में प्रभु राम का विधि-विधान से पूजन भी करते हैं।

शुभ मुहूर्त : पंचांग के अनुसार, इस वर्ष चैत्र शुक्ल नवमी तिथि का प्रारंभ 26 मार्च 2026 की सुबह से होगा और इसका समापन अगले दिन होगा। भगवान राम का जन्म दोपहर के समय हुआ था, इसलिए मध्याह्न काल में पूजा करना सबसे उत्तम माना जाता है।
पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त: सुबह 11:15 बजे से दोपहर 01:40 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे (इस समय भगवान का जन्मोत्सव मनाना श्रेष्ठ है)।
पूजा की सामग्री : शास्त्रों के अनुसार, श्री राम की पूजा में शुद्धता का विशेष महत्व है। पूजा शुरू करने से पहले इन सामग्रियों को एकत्रित कर लें:
-भगवान राम की प्रतिमा या चित्र, रोली, अक्षत (बिना टूटे चावल), चंदन।
-कलावा, फल, फूल (विशेषकर कमल या गुलाब), माला।
-धूप-दीप, घी, कपूर, गंगाजल, तुलसी दल
-पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर)।
-भगवान के लिए सुंदर वस्त्र और श्रृंगार का सामान।
पूजन विधि :
-राम नवमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
-चौकी की स्थापना: एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर राम दरबार या प्रभु राम की प्रतिमा स्थापित करें।
-गंगाजल और पंचामृत से भगवान को स्नान कराएं। इसके बाद उन्हें साफ वस्त्र पहनाकर चंदन का तिलक लगाएं।
-श्री राम को फल और मिठाई का भोग लगाएं। याद रखें कि भगवान राम की पूजा में तुलसी दल जरूर शामिल करें, क्योंकि इसके बिना भोग अधूरा माना जाता है।
- इस दिन 'राम रक्षा स्तोत्र', 'रामायण' के बालकांड का पाठ या 'रामचरितमानस' का पाठ करना अत्यंत फलदायी होता है।
आरती: अंत में घी के दीपक से 'श्री रामचंद्र कृपालु भजु मन' वाली आरती करें और प्रसाद वितरण करें।
इन मंत्रों का जाप करें
"ॐ श्री रामाय नमः"
"राम रामाय नमः"
"श्री राम जय राम जय जय राम"
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