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• स्वास्थ्य विभाग की वर्चुअल मीटिंग में जुड़े प्रदेश भर के 40 कम्युनिटी रेडियो प्रतिनिधि
• राज्य क्षय रोग अधिकारी ने टीबी के विभिन्न पहुओं से कराया अवगत

लखनऊ । उत्तर प्रदेश के 40 सामुदायिक रेडियो प्रतिनिधियों को सोमवार को ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) पर संवेदित किया गया। राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ शैलेंद्र भटनागर ने टीबी के प्रति जागरूकता फैलाने में सामुदायिक रेडियो की भूमिका को अहम बताते हुए कहा कि “टीबी कोई अभिशाप नहीं है, यह एक संक्रामक बीमारी है जिसका इलाज संभव है। सही जानकारी और जागरूकता ही इस बीमारी से बचाव और उपचार का सबसे बड़ा साधन है।”

‘स्मार्ट’ व सेंटर फार एडवोकेसी एंड रिसर्च के सहयोग से आयोजित वर्चुअल मीटिंग में  डॉ शैलेंद्र भटनागर ने कहा कि  आप लोग टीबी के प्रति समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने में सशक्त माध्यम बन सकते हैं। उन्होंने बताया कि 100 दिवसीय सघन टीबी अभियान का उद्देश्य अधिक से अधिक टीबी के लक्षण वाले रोगियों को खोजना, टीबी से होने वाली मृत्यु दर को कम करना और स्वस्थ व्यक्तियों में संक्रमण रोकना है।

डॉ भटनागर ने बताया कि भारत में दुनिया के सबसे अधिक टीबी मरीज हैं। फेफड़े के टीबी के रोगी को अगर इलाज न मिले तो वह एक साल में 15 नए रोगी बना सकता है। इसलिए आपके माध्यम से जनसामान्य को यह जानना जरूरी है। इसके अलावा टीबी का इलाज संभव है और यह पूरी तरह से ठीक हो सकती है। यह संदेश भी आमजन तक फैलाना जरूरी है।

उन्होंने बताया कि देश-प्रदेश से टीबी उन्मूलन का लक्ष्य मौजूदा साल ही है और यह समाज के प्रत्येक व्यक्ति के जुड़े बिना नहीं संभव हो सकता। समाज के कोने-कोने तक टीबी के प्रति जागरूकता फैलाने में आप बेहतर भूमिका निभा सकते हैं।

उन्होंने रेडियो प्रतिनिधियों से कहा कि महिलाओं व बच्चों के बारे में भी आम जनमानस को बताना जरूरी है। महिलाओं में बांझपन का कारण टीबी हो सकता है इसी तरह बच्चों व बुजुर्गों की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के कारण उन्हें टीबी होने की संभावना ज्यादा रहती है।

एक प्रतिभागी ने सवाल किया कि मरीज बीच में इलाज क्यों छोड़ देते हैं और उन्हें वापस इलाज के लिए कैसे लाया जा सकता है। इसके जवाब में डॉ. भटनागर ने बताया कि टीबी का इलाज शुरू करने के 2 महीने में लगभग 80% बैक्टीरिया मर जाते हैं और मरीज़ ठीक महसूस करने लगते हैं। इस कारण कई बार मरीज इलाज बंद कर देते हैं। हालांकि, शेष 20% बैक्टीरिया को नष्ट करने में चार महीने या अधिक समय लग सकता है। इलाज बीच में बंद करने से टीबी ड्रग रजिस्टेंट हो जाती है और इलाज का कोर्स लंबा हो जाता है। मरीजों को इलाज पर वापस लाने के लिए सुपरवाइजर उनकी निगरानी करते हैं और काउंसलिंग के माध्यम से उन्हें प्रेरित करते हैं।

कार्यक्रम में टीबी के लक्षणों, इलाज की उपलब्धता और मिथकों को तोड़ने जैसे मुद्दों पर जोर दिया गया। इसके अलावा, टीबी विजेताओं की प्रेरणादायक कहानियों के माध्यम से लोगों को प्रेरित करने और सरकारी योजनाओं, जैसे कि निक्षय पोषण योजना, की जानकारी प्रसारित करने पर भी बल दिया गया। डॉ. भटनागर ने सामुदायिक रेडियो को प्रेरित किया कि वे स्थानीय भाषाओं, गीतों और पैनल चर्चाओं के माध्यम से संदेशों को अधिक प्रभावी ढंग से प्रसारित करें।


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