लखनऊ। Filariasis News: राष्ट्रीय फ़ाइलेरिया (Filariasis) उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश के 27 जनपदों में 10 अगस्त से दो सितम्बर तक एमडीए/आईडीए अभियान चला था जिसके तहत लक्षित लाभार्थियों को घर घर जाकर फ़ाइलेरिया रोधी दवा का सेवन कराया गया था। दो सितम्बर को खत्म हुए अभियान में 6.52 करोड़ लोगों नें फ़ाइलेरिया रोधी दवा का सेवन किया है ।
राज्य कार्यक्रम अधिकारी, फाइलेरिया डा. ए.के.चौधरी ने बताया कि इस अभियान में 7.69 करोड लोगों को फ़ाइलेरिया से बचाव की दवा का सेवन कराने का लक्ष्य था| जिसके सापेक्ष 6.52 करोड़ लोगों ने फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन किया है।
डॉ चौधरी ने लोगों से अपील कि है कि यदि किन्ही कारणों से किसी ने अभी भी नहीं खाई है फाइलेरिया रोधी दवा तो और देर न करें अपने नजदीकी स्वास्थ्य इकाई में जा कर दवा सेवन अवश्य करें।
27 जनपद हैं -औरैया, बहराइच, बलरामपुर, बस्ती, इटावा, फर्रुखाबाद, गाज़ीपुर, गोंडा, देवरिया, गोरखपुर, कन्नौज, कुशीनगर, महाराजगंज, संतकबीर नगर, श्रावस्ती, सिद्धार्थ नगर और सुल्तानपुर, सीतापुर, रायबरेली, मिर्ज़ापुर, लखीमपुर खीरी, कौशाम्बी, कानपुर नगर, कानपुर देहात, फतेहपुर, चंदौली और हरदोई जहाँ यह अभियान चला था।
तीन जिलों गोंडा, श्रावस्ती और फतेहपुर में अभियान के दौरान आशा सम्मलेन आयोजित होने के कारण दो दिन फ़ाइलेरिया रोधी दवा का सेवन नहीं हो पाया था। इसके साथ ही कुछ अन्य जनपदों के 40 गांवों में बारिश और जलभराव के कारण अपेक्षा से कम लक्ष्य की प्राप्ति हुई है इन कारणों से इन गांवों में और उपरोक्त तीन जनपदों में पांच और छह सितम्बर को फ़ाइलेरिया रोधी दवा का सेवन कराया जायेगा।
अभियान के दौरान जनपद बलरामपुर, कौशांबी और खीरी में 90 फीसद से अधिक लोगों ने फ़ाइलेरिया रोधी दवा का सेवन किया है। हमारा लक्ष्य है कि मॉप अप राउंड चलाकर छूटे हुए सभी लोगों को फ़ाइलेरिया रोधी दवा का सेवन कराया जाये।
इस अभियान में सहयोगी संस्थाओं विश्व स्वास्थ्य संगठन, सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफॉर), पाथ और प्रोजेक्ट कंसर्न इंटर नेशनल(पीसीआई) का भी सहयोग रहा है।
फाइलेरिया क्या है
फाइलेरिया, एक संक्रामक रोग है जो कि निमेटोड परजीवियों (Wuchereria bancrofti) की वजह से होता है। इससे शरीर में सूजन और बुखार हो सकता है। कुछ गंभीर मामलों में ये शरीर की बनावट बदल सकता है जैसे त्वचा का मोटा होना और पैरों में सूजन।
फाइलेरिया के लक्षण
-सूजन, जो कि पैरों में व्यापक रूप से देख जा सकता है।
-लिम्फेडेमा, जिसमें आपके लसीका तंत्र में तरल पदार्थ का निर्माण होता है और ये सूजन और बुखार पैदा करता है।
-अंडकोश में सूजन और तरल पदार्थ का निर्माण।
-आपकी बाहों, पैरों, स्तनों और महिला जननांगों (योनि) में सूजन और तरल पदार्थ का निर्माण हो सकता है।
-सिर दर्द
-बुखार
Read More: NEET की नई तारीख का ऐलान, 21 जून को दोबारा परीक्षा होगी




