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नई दिल्ली। Arthritis Early Symptoms: गठिया की बीमारी लोगों में तेजी से बढ़ रही है. इस बीमारी की वजह से जोड़ों में सूजन आती है. आर्थराइटिस (Arthritis ) के कारण अब कम उम्र के लोगों भी चपेट में आ रहे हैं. यह बीमारी कूल्हों, हाथों और घुटनों पर असर कर रही है

आर्थराइटिस के कारण कुछ मामलों में मरीज को रुमेटॉयड आर्थराइटिस भी हो सकता है. इस बीमारी की वजह से शरीर का इम्यून सिस्टम ​बिगड़ जाता है. इसकी वजह से शरीर में सूजन बढ़ जाती है

आर्थराइटिस के लक्षण

जोड़ो का अकड़ जाना: जोड़ो का अकड़ना आर्थराइटिस का सबसे आम लक्षण हो सकता है. जोड़ों में अकड़न और असहनीय दर्द होने पर डॉक्टर से जांच जरूर कराएं. डॉक्टरों का कहना है कि जोड़ो में अकड़न की समस्या लंबे समय तक बैठे रहने की वजह से भी होती है. हालांकि अगर जकड़न पुरानी हो जाए तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि यह ऑस्टियोआर्थराइटिस का संकेत हो सकता है.

पैर के अंगूठे में तेज दर्द: जब पैर के अंगूठे में आपको बहुत ज्यादा दर्द महसूस होने लगे तो इसे हल्के में न लें. क्योंकि ये भी गठिया का एक शुरुआती लक्षण है. हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, अगर पैर का अंगूठा छूने पर बहुत गर्म महसूस हो तो ये भी गठिया का संकेत हो सकता है. 

 नींद न आना: जब शरीर में गठिया का रोग पैदा होने लगता है तो नींद में कठिनाई भी महसूस होने लगती है. हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, नींद की कमी की वजह से आर्थराइटिस का दर्द और ज्यादा होता है, क्योंकि नींद न आने के कारण सूजन बढ़ जाती है. आर्थराइटिस फाउंडेशन का कहना है कि इस स्थिति वाले 80 प्रतिशत से ज्यादा लोगों को जोड़ों में दर्द, जकड़न और सूजन के कारण सोने में परेशानी होती है.

 थकान: रुमेटीइड गठिया से पीड़ित लोगों के जोड़ों में सूजन पैदा होने लगती है, जो कमजोरी, नींद में कमी, थकान का कारण बनती है. ज्यादा थकान की यह भावना इस बीमारी के सबसे शुरुआती लक्षणों में से एक है.

वजन का बढ़ना 

आर्थराइटिस होने का बड़ा कारण बढ़ता वजन है. इसे बीएमआई ज्यादा हो जाता है. उनमें आर्थराइटिस का रिस्क अधिक होता है. आर्थराइटिस से बचाव को लेकर वजन को कंट्रोल में रखने की आवश्यकता है. काफी हद तक आर्थराइटिस से बचाव किया जा सकता है. इसके लिए अनुशासन की जरूरत है.

आर्थराइटिस से बचाव के तरीके

डॉक्टर का कहना है कि वजन को नियंत्रित हल्का व्यायाम करना जरूरी है. इसके लिए तैराकी और पैदल चलना जरूरी है. इससे जोड़ों के पास मांसपेशिया ताकतवर बनती हैं. वजन को नियंत्रित रखने के लिए  डाइट का रोल सबसे अहम रहा है. इसके लिए खानपान में फल, सब्जियों, साबुत अनाज और ओमेगा-3 फैटी एसिड्स लेने की आवश्यकता है. इसके लिए ज्यादा फैट वाले फूड को खाना चाहिए. फैटी भोजन से वजन बढ़ सकता है. इससे जोड़ों में दर्द बढ़ जाता है. इसमें खानपान का ध्यान रखना जरूरी है.

वजन को नियंत्रित न रखने वाले गठिया, इसके अलावा कई दूसरी बीमारियां की वजह रही है. इसके लिए अपनी दिनचर्या को बदलने की जरूरत हैं. सोने और जागने का वक्त तय करना चाहिए. प्रयास करें कि देर रात भोजन करने से दूर रहें. चीनी, नमक और मैदा कम खाना चाहिए.

 


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