वाशिंगटन । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के हमले को ईरान और उसके सहयोगियों की लगभग आधी सदी से की जा रही हिंसा का बदला बताया। उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
ट्रंप ने बुधवार रात अमेरिकी मतदाताओं से युद्ध के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश की। राष्ट्रपति ट्रंप ने लगभग 20 मिनट के अपने राष्ट्र के नाम संबोधन में अमेरिकी सैन्य अभियान की तारीफ की। उन्होंने देशवासियों से सब्र रखने की अपील की। इस युद्ध को अमेरिकियों के सुरक्षित भविष्य के लिए किया गया एक "निवेश" बताया। राष्ट्रपति ट्रंप का यह 28 फरवरी से छिड़े युद्ध के दौरान ईरान को केंद्र में रखकर दिया गया पहला राष्ट्र के नाम संबोधन है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने कहा, "मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि हम मुख्य रणनीतिक लक्ष्य पूरे होने के करीब हैं।" उन्होंने अपना वह वादा दोहराया कि अगले दो से तीन हफ्तों में वह ईरान पर बमबारी करके उसे "पाषाण युग में वापस भेज देंगे।" उन्होंने ईरान के बिजली संयंत्रों पर हमला करके युद्ध को और बढ़ाने की अपनी धमकी को ही दोहराया। उन्होंने कहा, " ईरान का नया नेता कम कट्टरपंथी है और कहीं ज़्यादा समझदार है। अगर इस दौरान कोई समझौता नहीं हो पाता है, तो हमारी नजरें कुछ अहम ठिकानों पर रहेंगी।"
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी अधिकारी युद्ध खत्म करने के लिए मध्यस्थों के साथ काम कर रहे हैं। व्हाइट हाउस से संबोधन के दौरान उन्होंने अपने इस दावे को दोहराया कि अमेरिका ने सत्ता परिवर्तन हासिल कर लिया है। उनके सभी मूल नेताओं की मौत हो चुकी है। ट्रंप ने कहा, "अगर कोई समझौता नहीं होता है, तो हम उनके बिजली संयंत्रों पर एक साथ हमला करेंगे। राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान युद्ध खत्म होने के करीब है। उन्होंने अनुमान लगाया कि इसमें अभी दो से तीन हफ्ते और लगेंगे।
ट्रंप ने कहा, "आज रात, मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि ये मुख्य रणनीतिक उद्देश्य पूरे होने के करीब हैं।" ट्रंप ने कहा, "हमने यह सब कर दिखाया है। उनकी नौसेना खत्म हो चुकी है। उनकी वायुसेना खत्म हो चुकी है। उनकी मिसाइलें लगभग खत्म हो चुकी हैं या उन्हें नष्ट कर दिया गया है। कुल मिलाकर, ये कदम ईरान की सेना को पंगु बना देंगे, आतंकवादी गुटों को समर्थन देने की उनकी क्षमता को कुचल देंगे और उन्हें परमाणु बम बनाने की क्षमता से वंचित कर देंगे। हमारी सशस्त्र सेनाओं ने असाधारण काम किया है।" (हि.स.)
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