-महानिदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण ने कहा- हमारा लक्ष्य, डायरिया से न हो किसी भी बच्चे की मौत
-ओआरएस दिवस पर ‘डायरिया से जीवन सुरक्षा’ पर संगोष्ठी आयोजित
-पीएसआई इंडिया व केनव्यू के सहयोग से “डायरिया से डर नहीं” कार्यक्रम के तहत आयोजित हुई संगोष्ठी
लखनऊ। डायरिया रोको अभियान के तहत विश्व ओआरएस दिवस पर स्वास्थ्य विभाग के तत्वावधान में पापुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल इंडिया (पीएसआई इंडिया) और केनव्यू के सहयोग से एक स्थानीय होटल में “डायरिया से जीवन सुरक्षा” पर संगोष्ठी आयोजित की गयी।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए महानिदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. दिनेश कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि डायरिया से किसी भी बच्चे की मौत न होने पाए। डायरिया के नियंत्रण व प्रबंधन में ओआरएस और जिंक की बड़ी भूमिका है, जिसकी उपलब्धता स्वास्थ्य इकाइयों और आशा कार्यकर्ताओं को सुनिश्चित करायी गयी है। इस मौके पर आशा कार्यकर्ताओं, स्टाफ नर्स, कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर, एएनएम को प्रतीक चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया।
महानिदेशक ने कहा कि डायरिया रोकथाम और प्रबन्धन में समुदाय स्तर पर जागरूकता की भी बहुत जरूरत है, जिसके लिए कई स्वयंसेवी संस्थाएं प्रयासरत हैं। राज्य सरकार द्वारा संचालित डायरिया रोको अभियान में सहयोग के लिए पीएसआई इंडिया और केनव्यू के सहयोग से चलाये जा रहे “डायरिया से डर नहीं” कार्यक्रम को उन्होंने सराहा।
इस मौके पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन उत्तर प्रदेश के बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के महाप्रबन्धक डॉ. मिलिंद वर्धन ने कहा कि बच्चों के डायरिया प्रबन्धन में ओआरएस एक किफायती और सर्व सुलभ उपाय है, जो शरीर में पानी की कमी (निर्जलीकरण) की समस्या को दूर करने का सबसे कारगर तरीका है। बच्चों में डायरिया से होने वाला निर्जलीकरण ही मृत्यु का कारण बनता है। डायरिया की शीघ्र पहचान कर समय से ओआरएस और जिंक दिया जाए तो बच्चे को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। डायरिया के प्रति समुदाय स्तर पर जनजागरूकता बढ़ाने और लोगों को ओआरएस और जिंक की महत्ता को भलीभांति समझाने के लिए प्रदेश में वृहद स्तर पर 16 जून से 31 जुलाई तक डायरिया रोको अभियान चलाया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य बच्चों में डायरिया की रोकथाम, ओआरएस व जिंक के उपयोग को प्रोत्साहन और जनसामान्य में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाना है।
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