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•    जीआईपीए सम्मेलन में एचआईवी मरीजों की समावेशी देखभाल का रोडमैप तैयार
•    समुदाय की भागीदारी से ही संभव है एड्स उन्मूलन: प्रो. सीएम सिंह

लखनऊ।एड्स उन्मूलन की दिशा में अब रणनीति बदल रही है - एचआईवी से प्रभावित लोग केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि इस लड़ाई के केंद्र में होंगे। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए  जीआईपीए (ग्रेटर इन्वाल्वमेंट ऑफ़ पीपल लिविंग विथ एचआईवी/ एड्स) सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें समुदाय की भागीदारी को कार्यक्रम की सबसे बड़ी ताकत बताया गया।

सम्मेलन का आयोजन उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी (यूपीसैक्स) और आरएमएल आयुर्विज्ञान संस्थान (आरएमएलआईएमएस) के सामुदायिक चिकित्सा विभाग द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इसमें एआरटी काउंसलर्, एचआईवी मरीज, सामुदायिक प्रतिनिधि और विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल हुए।

कार्यक्रम का उद्घाटन निदेशक आरएमएलआईएमएस प्रो. (डॉ.) सी. एम. सिंह, संयुक्त निदेशक यूपीसैक्स रमेश चंद्र श्रीवास्तव व डॉ. संजय सोलंकी, प्रोफेसर, सामुदायिक चिकित्सा डॉ. मनीष सिंह, उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (यूपीएसएलएसए) के सचिव संतोष कुमार एवं यूपीएनपी प्लस की अध्यक्ष अजिता यादव द्वारा किया गया।

मुख्य अतिथि के तौर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए निदेशक आरएमएल प्रो. (डॉ.) सीएम सिंह, ने कहा कि एचआईवी मरीजों की भागीदारी नीति निर्माण से लेकर क्रियान्वयन और निगरानी तक सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि योजनाओं का लाभ हर जरूरतमंद तक पहुंचे और उन्हें सम्मानजनक जीवन मिल सके। उन्होंने कहा - “जीआईपीए की अवधारणा इस बात पर आधारित है कि एचआईवी से प्रभावित लोग केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि इस लड़ाई के बराबर के भागीदार हैं। आज का यह सम्मेलन भविष्य की रणनीति तय करने में अहम साबित होगा।”

संयुक्त निदेशक यूपीसैक्स, रमेश चंद्र श्रीवास्तव ने कि राज्य के सभी 75 जिलों में कम्युनिटी सिस्टम स्ट्रेंथनिंग ग्रुप (सीएसएसजी) का गठन किया गया है। ये समूह जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में कार्य करेंगे और इनमें सामुदायिक प्रतिनिधि सह-संयोजक की भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि ये समूह समुदाय से फीडबैक लेकर जिला कोर कमेटी को सुझाव देंगे, जिससे योजनाओं में सुधार किया जा सके। संयुक्त निदेशक ने कहा -  “इस पहल के तहत एड्स उन्मूलन में समुदाय की आवाज को प्राथमिकता दी जाएगी जिससे कार्यक्रम की सामुदायिक नेतृत्व आधारित निगरानी मज़बूत होगी । यह मॉडल एड्स उन्मूलन की दिशा में अहम भूमिका निभाएगा।”

संयुक्त निदेशक यूपीसैक्स, डॉ. संजय सोलंकी ने कहा कि इलाज उपलब्ध होने के बावजूद सामाजिक कलंक अब भी सबसे बड़ी बाधा है। उन्होंने समाज से अपील की कि एचआईवी मरीजों को मुख्यधारा में लाने की जिम्मेदारी हर नागरिक की है।

विशेष अतिथि, उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (यूपीएसएलएसए) के सचिव संतोष कुमार ने बताया कि एचआईवी प्रभावित लोगों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निःशुल्क कानूनी सहायता मिल सकती है। उन्होंने महिलाओं, अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग, दिव्यांगजनों और आय मानदंड के अंतर्गत आने वाले लोगों के लिए उपलब्ध कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी।

क्या है जीआईपीए?
जीआईपीए (ग्रेटर इन्वाल्वमेंट ऑफ़ पीपल लिविंग विथ एचआईवी/ एड्स) एक वैश्विक सिद्धांत है, जिसके तहत एचआईवी से प्रभावित लोगों की भागीदारी को नीति निर्माण, कार्यक्रमों के क्रियान्वयन और निगरानी तक सुनिश्चित किया जाता है। इसका उद्देश्य एचआईवी मरीजों, सामुदायिक प्रतिनिधियों, विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं को एक मंच पर लाकर अनुभव साझा करना, जागरूकता बढ़ाना और एचआईवी/ एड्स के प्रति सामुदायिक नेतृत्व को मज़बूत करना है ताकि एचआईवी से जुड़े कलंक और भेदभाव को कम किया जा सके, सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हो और प्रभावित लोग सशक्त होकर इस लड़ाई के सक्रिय भागीदार बनें।

 


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