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लखनऊ। बुलंदशहर प्रदेश का पहला जिला बन गया है जहां एक ही संस्था ने सभी ट्यूबरक्लोसिस मरीजों को गोद लेकर पोषण देने का फैसला किया है। इस बावत नरौरा परमाणु एटामिक पॉवर प्लांट एवं स्वास्थ्य विभाग के मध्य एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इस मौके पर जिलाधिकारी श्रुति मौजूद रहीं।

राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ शैलेंद्र भटनागर ने इस पहल की तारीफ करते हुए कहा कि नरौरा पावर प्लांट जैसे कुछ और संस्थान आगे आ जाएं तो निश्चित तौर पर प्रदेश के प्रत्येक टीबी मरीज को राहत मिलेगी और टीबी को खत्म करने में निर्णायक भूमिका अदा करेंगे। अच्छा पोषण टीबी रोगियों के बेहतर स्वास्थ्य लाभ में मदद करता है और टीबी के कारण होने वाली मृत्यु को रोकता है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में टीबी मुक्त भारत अभियान फोकस होकर कार्य कर रहा है। 7 दिसंबर 2024 से 15 नवंबर 2025 तक 2.45 करोड़ जोखिम वाली आबादी का स्क्रीनिंग की गई। इनमें से 67.41 लाख व्यक्तियों का एक्सरे परीक्षण किया गया और 5.45 लाख मरीजों को चिन्हित कर उपचार पर रखा गया है।  कुल 22 लाख नाट परीक्षण किए गए हैं। 3.99 लाख मरीजों को कम से कम एक पोषण पोटली मिली है। मृत्यु दर कम करने के लिए दो लाख रोगियों का  डिफरेंशिएटेड टीबी केयर के लिए मूल्यांकन किया गया है। 4.69 लाख घरेलू संपर्कों को टीबी से बचाव का उपचार दिया गया है।

बुधवार को जिलाधिकारी श्रुति की अध्यक्षता एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील दोहरे की उपस्थिति में नरौरा परमाणु एटोमिक पॉवर प्लाण्ट के निदेशक महेश प्रसाद राठ और जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. हेमंत रस्तोगी के मध्य एमओयू पर हस्ताक्षर किया गया। जिलाधिकारी ने पांच क्षय रोगियों को गोद लेकर पोषण वितरण भी किया। वर्तमान में बुलन्दशहर में 7953 क्षय रोगियों को उपचार दिया जा रहा है।


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