नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा जंग छिड़ने की वजह से ब्रेंट क्रूड बुधवार को दो महीने के ऊपरी स्तर पर पहुंच गया। इसकी कीमत ने 92 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर लिया। इसी तरह वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड भी आज एक बार फिर 85 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया।
जानकारों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ रहे तनाव की वजह से एक बार फिर कच्चे तेल की सप्लाई पर संकट बढ़ाने की आशंका बन गई है। टीएनवी फाइनेंशियल सर्विसेज के सीईओ तारकेश्वर नाथ वैष्णव का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच जंग लगातार तेज हो रही है। दोनों पक्षों की ओर से लगातार हमले हो रहे हैं। इस बीच ईरान की ओर हूती विद्रोहियों ने भी मोर्चा संभालने का ऐलान कर दिया है।
हूती विद्रोहियों ने धमकी दी है कि अगर अमेरिका की ओर हो रहे हमले नहीं रुके तो वे रेड सी और बाब अल मंडेब जलडमरूमध्य के रास्ते जहाजों की होने वाली आवाजाही को ठप कर देंगे। हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर मैरीटाइम बैन भी लगा दिया है और शिप ओनर्स को सऊदी के बंदरगाहों पर नहीं आने की धमकी भी दी है।
वैष्णव का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य पहले से ही ठप पड़ा हुआ है। ऐसे में अब अगर रेड सी और बाब अल मंडेब से भी जहाजों की आवाजाही रुक जाती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई बुरी तरह से प्रभावित होगी। खासकर, सऊदी अरब और यमन की ओर से होने वाली कच्चे तेल की सप्लाई पूरी तरह से बंद हो जाएगी। कच्चे तेल की सप्लाई के संकट की आशंका के कारण ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत में तेजी से का रुख बना हुआ है।
तारकेश्वर नाथ वैष्णव का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमत भारत जैसे कच्चे तेल के आयातक देश के लिए चिंता की एक बड़ी वजह बन सकती है। जियो-पॉलिटिकल टेंशन की वजह से अगर कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक तेज बनी रही तो भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट काफी बढ़ सकता है। (हि.स.)
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