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हेल्थ डेस्क। भारत में ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस HMPV के अब तक 9 मामले सामने आ चुके हैं। हालांकि केंद्रीय स्वास्थ मंत्रालय का कहना है कि  यह वायरस सामान्य है और इससे डरने की जरूरत नहीं है। बावजूद इसके हमें किसी भी समझदार और जागरूक व्यक्ति की तरह इसे लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।

भारत में सामने आए ज्यादातर मामलों में बच्चों की उम्र 1 साल से कम है। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के मुताबिक, HMPV वायरस का सबसे अधिक खतरा छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों को है।

जिन लोगों को अस्थमा, डायबिटीज, या हार्ट से जुड़ी बीमारियां हैं, उन्हें ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस HMPV के गंभीर लक्षण महसूस होने का खतरा अधिक होता है।

HMPV वायरस से लंग्स और रेस्पिरेटरी सिस्टम सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं तो जो लोग स्मोक करते हैं या जिन्हें अस्थमा जैसी क्रॉनिक लंग्स कंडीशन है, उन्हें ज्यादा नुकसान हो सकता है। इसकी मुख्य वजह ये है कि इन लोगों के लंग्स पहले से ही कमजोर हैं।

HMPV के लक्षण

1-लगातार नाक बंद रहना या फिर नाक बहना

2-सूखी या गीली खांसी जो समय के साथ खराब हो सकती है

3-हल्का या तेज बुखार होना

4-गले में खराश, जलन और परेशानी होना

5-सांस लेते समय घरघराहट की आवाज, एयरवेज में रुकावट का संकेत हो सकता है।

6-सांस लेने में कठिनाई, खासकर गंभीर मामलों में।

7-आराम करने के बाद भी लगातार थकान और कमजोरी।

8-फेफड़ों में संक्रमण होना, जिसके के लिए मेडिकल केयर की जरूरत होती है

HMPV से बचाव का तरीका

1-हाथों को नियमित रूप से साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक धोएं।

2-साबुन और पानी मौजूद न होने पर अल्कोहल बेस्ड सैनिटाइजर का इस्तेमाल कर सकते हैं।

3-जिस भी व्यक्ति में रेस्पिरेटरी संबंधी बीमारी के लक्षण नजर आएं, उनसे दूर रहें।

4- खांसते या छींकते समय अपने मुंह और नाक को अच्छी तरह से कवर करें।

5-दरवाजे के हैंडल, फोन और टेबल जैसी बार-बार छुई जाने वाली चीजों को रेगुलर से साफ करें।

6-अपनी आंखों, नाक और मुंह को बार-बार अपने हाथों से छूने से बचें।

7-अगर आपको अपने अंदर कोई लक्षण नजर आ रहा है, तो वायरस को फैलने से रोकने के घर पर ही रहें।

8-हेल्दी डाइट, एक्सरसाइज और पूरी नींद के साथ एक हेल्दी लाइफस्टाइल फॉलो करें।

डॉक्टर सलाह पर दवा खाएं

इस वायरस के लिए अब तक न तो कोई खास एंटी वायरल दवा बनाई गई है और न ही कोई वैक्सीन ही है। डॉक्टरों का कहना है कि इसके लिए आम तौर पर सर्दी बुखार की दवाएं दी जाती हैं, लेकिन जिन्हें पहले से ही सांस की कोई बीमारी है उनमें ये वायरस परेशानी का कारण बन सकता है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


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