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-बीते पुरुष नसबंदी पखवारे में मेरठ में 33 पुरुषों तो वाराणसी में 32 पुरुषों ने अपनाई नसबंदी
- काउंसलर सेवाओं से दंपति को निर्णय लेने में मिल रही मदद

लखनऊ। परिवार नियोजन में पुरुषों की सहभागिता धीरे-धीरे बढ़ती दिख रही है। पश्चिम से निकली रौशनी की किरण अब पूर्वी उत्तर प्रदेश तक फैल रही है। बीते पुरुष नसबंदी पखवारे में जहां मेरठ में 33 पुरुषों ने नसबंदी को अपनाया तो वाराणसी में 32 पुरुषों ने खुशी-खुशी परिवार नियोजन के इस स्थाई साधन को अपनाकर बेहतरीन संदेश दिया।

ढाई साल पहले मुजफ्फरनगर के खतौली ब्लाक के गालिबपुर गांव के 19 पुरुषों ने नसबंदी अपनाकर एक बड़ी लकीर खींची थी। इस सफलता में गांव की आशा सुदेश की भी अहम भूमिका थी। इस नजीर ने पश्चिम से लेकर पूर्वी उत्तर प्रदेश तक मीडिया की सुर्खियां बटोरीं। नतीजा यह हुआ कि अब पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोग भी प्रदेश सरकार के इस सराहनीय प्रयास में कदमताल कर रहे हैं।

पूरे पखवारे के दौरान उत्तर प्रदेश में कुल 380 पुरुषों ने नसबंदी की सेवा को अपनाया था जिसमें सर्वाधिक मेरठ (33) के अलावा वाराणसी में 32, प्रयागराज में 18, कौशाम्बी में 17,  देवरिया में 15, लखनऊ और जौनपुर में 13-13 तथा औरैया में 11 पुरुषों ने नसबंदी की सेवा को अपनाया।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के महाप्रबंधक परिवार नियोजन डा. सूर्यांशु ओझा के अनुसार परिवार नियोजन के साधन अपनाने में महिलाएं पुरुषों से आगे हैं लेकिन बीते पुरुष नसबंदी पखवारे के आंकड़े देखकर लगता है कि बदलाव आना शुरू हो चुका है। 

उन्होंने बताया कि पुरुष नसबंदी को लेकर कई भ्रांतियां हैं जैसे  नसबंदी अपनाने से पौरुष क्षमता में कमी आती है जो कतई गलत है। पुरुषों की सहभागिता को बढ़ाने के लिए समुदाय स्तर से लेकर नीतिगत स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। बहुत से परामर्शदाताओं को परिवार नियोजन पर प्रशिक्षित किया गया है। इसका परिणाम है कि पुरुषों के स्थाई साधन अपनाने में इजाफा हुआ है।  

महाप्रबंधक ने बताया कि बीते पखवाड़े के मोबिलाइजेशन चरण में 2443 सारथी वाहनों द्वारा प्रदेश के 816 विकासखंडों के विभिन्न गाँवों में जाकर पुरुष नसबंदी सहित परिवार नियोजन के अन्य साधनों के बारे में जागरूक किया गया। इसके साथ ही अभियान के दौरान 31.8 लाख कंडोम का वितरण हुआ जिसमें 16.7 लाख कंडोम का वितरण आशा कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर जाकर किया गया। वहीं कुल 15.1 लाख कंडोम का वितरण परिवार नियोजन बॉक्स और आउटरीच सत्रों द्वारा किया गया।

परिवार नियोजन के फायदे बताकर किया राजी

मुजफ्फरनगर के खतौली ब्लाक के गालिबपुर गांव की आशा सुदेश का कहना है कि अक्सर समाज में फैली भ्रांतियों के चलते पुरुष नसबंदी करवाने से कतराते हैं और ठान लेते हैं कि नसबंदी नहीं कराएंगे। इसी वजह से वह प्रयास तो दूर नसबंदी के बारे में सोचते भी नहीं है। झिझक को छोड़कर जब गांव के लोगों की भ्रांतियों को दूर करते हुए बातचीत का सिलसिला शुरू किया और फायदे गिनाए तो वह नसबंदी को राजी होने लगे। उन्होंने बताया- आठ लोगों ने परिवार नियोजन का यह स्थाई साधन पुरुष नसबंदी पखवाड़े के दौरान अपनाया, बाकी लोग इसका महत्व समझकर आगे आते रहे। सुदेश कहती हैं वह परिवार नियोजन का महत्व समझाती गयीं और लोग समझते गये, परिणाम सामने है।


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