चीन में गहराया पानी संकट, एशिया के दूसरे देशों में भी हो सकती है दिक्क्त

उत्तर चीन में पानी को लेकर हालात अरब देशाें से भी बदतर है। अगर चीन में यह हालात सामान्य नहीं हुआ तो इसका खामियाज़ा एशिया के दूसरे देशाें को भी भुगतना पड़ सकता है। जैसा कि गोपाल रेड्डी कहते हैं कि चीन के पास दुनिया की 20 प्रतिशत आबादी है
 
चीन में गहराया पानी संकट, एशिया के दूसरे देशों में भी हो सकती है दिक्क्त 

बीजिंग। उत्तर चीन में पानी को लेकर हालात अरब देशाें से भी बदतर है। अगर चीन में यह हालात सामान्य नहीं हुआ तो इसका खामियाज़ा एशिया के दूसरे देशाें को भी भुगतना पड़ सकता है। जैसा कि गोपाल रेड्डी कहते हैं कि चीन के पास दुनिया की 20 प्रतिशत आबादी है, लेकिन इसके पास पानी का केवल 7 प्रतिशत हिस्सा है। चीन की हजारों नदियां लुप्त हो गई हैं, जबकि औद्योगीकरण और प्रदूषण ने बचे पानी को बेकार कर दिया है।

कुछ अनुमानों के अनुसार, चीन का 80 से 90% भूजल और उसका आधा नदी का पानी पीने याेग्य नहीं है। आधे से अधिक भूजल और एक-चौथाई नदी जल इतना प्रदूषित है कि इसका उपयोग उद्योगों या खेती के लिए भी नहीं किया जा सकता है। विशेषज्ञों का आकलन है कि पानी की कमी के कारण चीन काे सालाना 100 अरब डॉलर (7.43 लाख कराेड़ रु.) से अधिक का नुकसान हो रहा है। इससे कृषि भूमि का बड़ा हिस्सा मरुस्थल में बन रहा है।

चीन की सरकार ने राशनिंग और जल दक्षता में सुधार को बढ़ावा दिया है, लेकिन संकट रोकने के लिए ये पर्याप्त नहीं है। दिसंबर में ही चीनी अधिकारियों ने घोषणा की कि ग्वांगझू और शेनझेन अगले साल भीषण सूखे का सामना करेंगे। जबकि ये दाेनाें क्षेत्र अपेक्षाकृत पानी से भरपूर पर्ल रिवर डेल्टा के प्रमुख शहर हैं। 2005 में चीन के तब के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने कहा था कि पानी की कमी ने ‘चीनी राष्ट्र के अस्तित्व को खतरे में डाल दिया है।’ जल संसाधन मंत्री ने घोषणा की कि चीन को ‘पानी की हर बूंद के लिए लड़ना चाहिए।’