स्वीडन की पहली महिला प्रधानमंत्री ने चंद घंटों में छोड़ा पद, जानिए फैसले की वजह

स्वीडन (Sweden) की पहली महिला प्रधानमंत्री मेगडालेना एंडरसन (Magdalena Andersson) ने पद संभालने के चंद घंटों बाद ही अचानक इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया। देश की प्रधानमंत्री चुने जाने के कुछ घंटों बाद ही संसद में बजट प्रस्ताव गिरने पर, मेगदालेना एंडरसन ने बुधवार को पद से इस्तीफा दे दिया। 
 
Magdalena Andersson
स्वीडन की पहली महिला प्रधानमंत्री

नई दिल्ली। स्वीडन (Sweden) की पहली महिला प्रधानमंत्री मेगडालेना एंडरसन (Magdalena Andersson) ने पद संभालने के चंद घंटों बाद ही अचानक इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया। देश की प्रधानमंत्री चुने जाने के कुछ घंटों बाद ही संसद में बजट प्रस्ताव गिरने पर, मेगदालेना एंडरसन ने बुधवार को पद से इस्तीफा दे दिया। 

आपको बता दें कि संसद में बिल गिरने के साथ ही सरकार में शामिल हुए सहयोगी घटक दल ग्रीन पार्टी (Green Party) ने सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया. शपथ लेने के 12 घंटों के भीतर सामने आए इस घटनाक्रम के बारे में जिसने भी सुना उसे यकीन नहीं हुआ. देश की अधिकारिक न्यूज़ एजेंसी के इस खबर की पुष्टि के बाद लोग हैरान नजर आए. उनका कहना है कि जिसके नेतृत्व में हम आगे बढ़ने की सोच रहे थे. ऐसे में इस इस्तीफे से हमें झटका लगा है

इस्तीफे के बाद का ऐलान
रिपोर्ट के मुताबिक इस्तीफा देने के बाद बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में एंडरसन ने कहा, ‘ये फैसला लेना आसान नहीं था. यह मेरी गरिमा से जुड़ा मामला है. मैं ऐसी सरकार का नेतृत्व नहीं करना चाहती जिसकी वैधानिकता पर एक भी सख्स सवाल खड़ा कर सके.’ हालांकि एंडरसन ने देश की संसद के स्पीकर एंड्रियास नोरलेन से कहा है कि वह अब भी ‘सोशल डेमोक्रेटिक’ की एक पार्टी की सरकार का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं

संवैधानिक स्थितियों पर हो रही चर्चा
एंडरसन ने ये भी कहा कि अगर एक पार्टी सरकार से समर्थन वापस लेती है तो गठबंधन की पूरी सरकार को इस्तीफा देना चाहिए. आपको बताते चलें कि स्वीडन की 349 सीटों वाली संसद के स्पीकर नोरलेन ने कहा कि उन्हें एंडरसन का इस्तीफा मिल गया है. इसके बाद देश में संवैधानिक संकट टालने के लिए वो हर संभवाना की तलाश में बाकी दलों के नेताओं से बात कर रहे हैं. वहीं सरकार बनाने के लिए विपक्षी दलों में भी सुगबुगाहट शुरू हो गई है

इस तरह मिला था देश का सर्वोच्च पद
संसद में मौजूद 117 सदस्यों ने एंडरसन के पक्ष में अपना वोट किया वहीं 174 सांसदों ने उनके विरोध में मतदान किया था. इस स्थिति के बाद देश के संविधान के मुताबिक फैसला लिया गया. दरअसल स्वीडन में अगर 175 सांसद किसी उम्मीदवार के खिलाफ नहीं हैं तो उसे प्रधानमंत्री (Prime Minister) नियुक्त किया जा सकता है. इस नियम के हिसाब से एंडरसन को देश का भावी प्रधानमंत्री बनाया गया था