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किराए के पैसे न देने पर महिलाओं से शारीरिक संबंध बनाने की मांग कर रहे हैं मकान मालिक

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नयी दिल्ली। कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन में किराए के मकान पर रह रहे लोगों पर तो मानो पहाड़ टूट पड़ा है। इस भयानक महामारी में नौकरी जाने के कारण लोगों के पास किराया चुकाने के लिए पैसे तक नहीं बचे हैं। पैसे न होने के चलते मकान मालिक किराए पर रहने वाली महिलाओं से किराये की एवज में शारीरिक संबंध बनाने की मांग कर रहे हैं।

अमेरिका में यौन उत्पीड़न के मामले 13% बढ़े

नेशनल फेयर हाउसिंग एलायंस (एनएफएचए) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 100 से भी ज्यादा फेयर हाउसिंग ग्रुप्स ने पूरे अमेरिका में लोगों को इस समस्या से जूझते देखा है। इस महामारी के बीच देश में यौन उत्पीड़न के मामले 13% बढ़े हैं।

घर से बाहर न निकाल दे इसलिए बनाए शारीरिक संबंध

एक महिला ने एनएफएचए की वेबसाइट से बातचीत में कहा है कि अगर वह अपने प्रॉपर्टी मैनेजर के साथ शारीरिक संबंध बनाने से इंकार कर देती तो उसे घर से बाहर निकाल दिया जाता। महिला का कहना है कि वह एक सिंगल मदर है। जिसके कारण उसके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था। महिला का कहना है कि उसने मजबूरी में आकर शारीरिक संबंध बनाया क्योंकि वह अपना घर नहीं खोना चाहती थी।

एनएफएचए के सलाहकार बोले

किराये के बदले शारीरिक संबंध की मांग करने वाले मामले अब अमेरिका समेत ब्रिटेन में भी जांच के दायरे में आ गए हैं। सेक्स के बदले रेंट फ्री एकोमोडेशन की सुविधा के नाम पर बढ़ते ऑनलाइन विज्ञापनों से भी पर्दा उठाया जाने लगा है। उत्तरी अमेरिका और यूरोपियन ऑथोरिटीज कैश बैनेफिट्स, रेंट फ्रीज़िस और निष्कासन प्रतिबंध से जुड़े नियम लेकर आई है, ताकि लोगों को बेघर होने से बचाया जा सके। एनएफएचए के सलाहकार मोर्गन विलियम्स का कहना है कि घर से बाहर ना निकलने के लिए बेबस लोगों के सामने कई बार बड़े कठिन विकल्प बचते हैं।

कानून की समझ न होने के चलते पीड़िताओं पर लग सकते हैं आरोप

किराए के लिए सेक्स की व्यापकता से जुड़ा डेटा दुर्लभ है। हाउसिंग एक्सपर्ट्स का कहना है कि कानून की समझ न होने के चलते उल्टा मकान मालिकों का शिकार हो रही पीड़ितों पर वैश्यावृति के आरोप लग सकते हैं। हाउसिंग चैरिटी शेल्टर (इंग्लैंड) की 2018 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले पांच सालों में प्रॉपर्टी मैनेजर्स ने तकरीबन ढाई लाख महिलाओं को किराया देने की बजाय सेक्स की पेशकश की है।

सेक्सटॉर्शन (यौन उत्पीड़न) के खिलाफ अभियान चलाने वाली ब्रिटिश लॉ मेकर वेहा हॉबहाउस का कहना है, ‘किराये के बदले सेक्स की मांग बढ़ने की संभावना पहले ही थी, क्योंकि लॉकडाउन के वक्त लोगों के पास घर में कैद रहने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं था।

डर के कारण केस नहीं दर्ज करवा रहीं हैं महिलाएं

हॉबहाउस ने कहा, ‘महामारी के दौरान पूरे ब्रिटेन में वित्तीय संकट से जूझ रहे लोगों ने इसका अनुभव किया है। किराया चुकाने में असमर्थ लोगों को मजबूरन मकान मालिकों की शर्त स्वीकार करनी पड़ी है। एनएफएचए ने अपनी रिपोर्ट में यह भी दावा किया है कि ज्यादातर महिलाएं मकान मालिकों के खिलाफ यौन उत्पीड़न का केस नहीं दर्ज करवा रही हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि ऐसा करने पर प्रॉपर्टी मैनेजर उन्हें घर से बेदखल कर देगा। दूसरा, उनकी आर्थिक तंगी से जुड़े भी कुछ कारण हो सकते हैं।

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नेपाल सियासी संकट: ओली का इस्तीफे से इनकार, पार्टी में विभाजन तय

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नई दिल्ली। नेपाल में सियासी संकट गहराता जा रहा है। शनिवार को होने वाली नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की स्थायी समिति की बैठक टल गई है।

प्रचंड नहीं पहुंचे बैठक के लिए

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के नेता पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से मिलने नहीं पहुंचे हैं। इसी के साथ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी विभाजन की ओर बढ़ती दिख रही है। उधर ओली ने इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया है।

शुक्रवार की बैठक फेल

इससे पहले शुक्रवार को प्रचंड और केपी ओली के बीच तीन घंटे बैठक तक बैठक हुई थी पर इसमेें दोनों के बीच कोई समझौता नहीं हुआ था।

अब सोमवार को मिलेंगे प्रचंड और ओली

शनिवार सुबह 9 बजे दोनों नेता एक बार फिर बैठक करने वाले थे। इसके बाद 11 बजे पार्टी की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक होनी थी। लेकिन प्रचंड के न पहुंचने से बैठक टल गई। अब ये बैठक सोमवार 6 जुलाई को होगी।

क्या है पूरा मामला

बता दें कि मौजूदा केपी ओली और पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड दोनों ही नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। प्रचंड का गुट चाहता है कि केपी शर्मा कार्यकारी अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दें और पार्टी के अपने तरीके से चलाने दें। लेकिन केपी शर्मा ओली कार्यकारी अध्यक्ष के पद से इस्तीफा नहीं देना चाहते हैं। इसी के चलते दोनों गुटों के बीच गतिरोध बढ़ता जा रहा है।

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मोदी ने दिखाया आईना तो तिलमिलाया चीन, कहा – हमें विस्तारवादी कहना गलत

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नई दिल्ली। लद्दाख के फॉरवर्ड पोस्ट पर सैनिकों को संबोधित करने के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सख्त संदेश में खुद को ‘विस्तारवादी राष्ट्र’ कहे जाने से चिढ़े चीन ने इस आरोप को बेबुनियाद बताया और कहा कि वे बातों को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं।

चीन की प्रतिक्रिया

चीन को इशारों में दिए गए इस संदेश पर बीजिंग की ओर से चीनी दुतावास के प्रवक्ता ने सख्त प्रतिक्रिया दी। चीनी दुतावास के प्रवक्ता जी रोंग ने कहा, “अपने 14 में से 12 पड़ोसी देशों के साथ सीमा का निर्धारण चीन ने शांतिपूर्ण बातचीत के जरिए किया है। हमने जमीनी सीमाओं को मैत्रीपूर्ण सहयोग में बदला है। चीन को ‘विस्तारवादी’ के तौर पर देखना बिल्कुल आधारहीन है और पड़ोसी देशों के साथ अपने विवादों को गढ़ने जैसा है।”

क्या बोले पीएम नरेंद्र मोदी

बता दें कि 15 जून को चीन के साथ झड़प में 20 जवानों की शहादत के बाद अचानक लद्दाख दौरे पर पहुंचे पीएम मोदी ने सैनिकों को संबोधित करते हुए बिना चीन का नाम लिए कहा, ”विस्तारवाद का युग समाप्त हो चुका है। यह युग विकासवाद का है। तेजी से बदलते हुए समय में विकासवाद ही प्रासंगिक है। विकासवाद के लिए अवसर है और विकासवाद भविष्य का आधार भी है।

मोदी ने कहा कि विस्तारवाद की जिद किसी पर सवार हो जाती है तो उसने हमेशा विश्व शांति के सामने खतरा पैदा किया है। और यह न भूलें इतिहास गवाह है। ऐसी ताकतें मिट गई हैं या मुड़ने को मजबूर हो गई है।”

 

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फिलीपींस ने चीन को चेताया, युद्धाभ्यास रोके वरना होंगे गंभीर परिणाम

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मनीला। चीन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बुरी तरह से घिरता दिख रहा है। पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी में हिंसक झड़प के बाद भारत के साथ स्थिति तनावपूर्ण है तो अब फिलीपींस ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर चीन विवादित दक्षिण चीन सागर में अपनी सैन्य अभ्यास जारी रखता है तो वह ‘गंभीर प्रतिक्रिया’ करेगा।

फिलीपींस के विदेश सचिव तियोदोरो लोक्सिन जूनियर ने शुक्रवार को चीन को चेतावनी दी है कि अगर चीन विवादित दक्षिण चीन सागर में चीनी सैन्य अभ्यास जारी रखता है तो फिलीपींस गंभीर प्रतिक्रिया करेगा

विदेश सचिव लोक्सिन ने कहा कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) 1 जुलाई से पेरासेल द्वीप समूह के बाहर अभ्यास कर रही है और चीनी समुद्री अधिकारियों ने सभी जहाजों को युद्धाभ्यास के क्षेत्र में नेविगेट करने से रोक रखा है।

चीनी जहां सैन्य युद्धाभ्यास कर जा रहा है, वहां के नो-एंट्री जोन की जांच करने के बाद, लोक्सिन ने कहा कि पेरासेल से पानी बंद हो गया है, जिसका विएतनाम की ओर से दावा किया जाता है। अब फिलीपींस क्षेत्र पर अतिक्रमण की कोशिश न करे। हालांकि उन्होंने इस पर चिंता जरूर जाहिर की।

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