हज यात्रा : वैक्सीन लगवाने वाले को ही मिलेगी मक्का में एंट्री

हज यात्रा : वैक्सीनेशन लगवाने वाले को ही मिलेगी मक्का में एंट्री
हज यात्रा : वैक्सीनेशन लगवाने वाले को ही मिलेगी मक्का में एंट्री

रियाद। पवित्र महीने रमजान में केवल उन लोगों को ही मक्का आने की अनुमति होगी, जिन्होंने वैक्सीन लगवाई हुई है। यह जानकारी सऊदी प्रशासन की ओर से दी गयी है।

सऊदी के हज और उमराह मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि इससे संबंधित लोगों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। पहली श्रेणी उन लोगों की है, जिन लोगों को वैक्सान लग चुकी है। दूसरी श्रेणी में 14 दिन से वैक्सीन लगवाए लोग हैं। तीसरी श्रेणी में वे लोग हैं, जो कोरोना से ठीक हो चुके हैं। इन तीन श्रेणियों के लोगों को ही मक्का और मदीना की पवित्र दरगाह में जाने की अनुमति होगी। इस महीने के अंत से रमजान के महीने की शुरुआत होने वाली है और उसी समय से यह नीति लागू हो जाएगी।

सऊदी सरकार द्वारा जारी गाइडलाइंस में बेहद सख्ती बरतने की बात कही गई है और किसी भी तरह की कोताही या ढिलाई पर सख्ती करने के आदेश दिए गये हैं। गाइडलाइंस में कहा गया है कि दोनों पवित्र मस्जिद में उमराह करने वालों को वैक्सीन का दोनों डोज लेना जरूरी है। वैक्सीन की एक डोज लेने वालों को दोनों पवित्र मस्जिद में उमराह करने की इजाजत नहीं होगी। इसके साथ ही सऊदी अरब ने कहा है कि वैक्सीन ले चुके तीर्थयात्रियों को भी सऊदी अरब प्रशासन की सभी नियम और शर्तों को सख्ती के साथ मानना होगा। मक्का जाने वाले तीर्थयात्रियों को पहले ही तारीख और समय चुनना होगा और सभी हज यात्रियों पर प्रशासन की तरफ से नजर रखी जाएगी।

बता दें की मक्का, हिजाज, सऊदी अरब के लिए इस्लामी तीर्थयात्रा है, जो मुसलमानों द्वारा किया जाता है जिसे वर्ष के किसी भी समय हज के विपरीत किया जा सकता है, जिसमें इस्लामी चंद्र कैलेंडर के मुताबिक़ विशिष्ट तिथियां हैं। अरबी में, ‘उमरा का अर्थ है “एक आबादी वाले स्थान पर जाना।” शरिया में, उमरा का अर्थ है कि इह्राम (एक पवित्र वस्त्र) ग्रहण करने के बाद, तवाफ़ को काबा, और सफ़ा और मरवा के बीच सई का प्रदर्शन करना है।

एक बार यात्रा करने और ज़ुआ-एल-हुलाफा, जुहफा, कर्नू ‘एल-मनाज़िल, यलमलम, जात-ए-इरक, इब्राहिम मुर्सिया या अल-हिल में एक जगह जैसे मिकत को पारित किया जाना चाहिए। हवाई यात्रियों के लिए अलग-अलग स्थितियां मौजूद हैं, जिन्हें मक्का शहर के बारे में एक विशिष्ट परिधि दर्ज करने के बाद इहराम का पालन करना होगा। इसे कभी-कभी ‘मामूली तीर्थयात्रा’ या ‘कम तीर्थयात्रा’ कहा जाता है, हज ‘प्रमुख’ तीर्थयात्रा है जो हर मुसलमान के लिए अनिवार्य है जो इसे अदा करने की क्षमता रखता है। उमरा अनिवार्य नहीं है लेकिन अत्यधिक अनुशंसित है।