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दुनिया

Corona virus ने ले ली इस राजकुमारी की जान, गम में डूबा शाही परिवार

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नई दिल्ली। चीन के वुहान शहर से निकला कोरोना वायरस (Corona virus) पूरी दुनिया पर कहर बनकर टूटा है। खास तौर पर यूरोप, ईरान और अमेरिका में इस वायरस ने तबाही मचा रखी रही। इस बीच स्पेन (Spain) से एक ऐसी खबर आई है जो आप के रोंगटे खड़े कर देगी। यहां का शाही परिवार भी इस वायरस से अछूता नहीं रहा। Spain की राजकुमारी मारिया टेरेसा (Maria teresa) की कोरोना (Corona) की चपेट में आने से मौत हो गई है।

86 साल की राजकुमारी मारिया (Maria ) स्‍पेन के राजा फिलिप छठे की चचेरी बहन थीं। उनके भाई राजकुमार सिक्‍टो एनरिक डे बोरबोन ने फेसबुक पर राजकुमारी के निधन की सूचना दी कि Corona virus से संक्रमित होने से उनकी बहन राजकुमारी Maria का निधन हो गया है। इस तरह से मारिया टेरेसा (Maria teresa) दुनिया में शाही परिवार की पहली सदस्‍य बन गई हैं, जिनकी कोरोना वायरस से उपजे कोविड-19 महामारी से मौत हो गई है।

पीपुल मैग्जीन के मुताबिक,  28 जुलाई 1933 को जन्‍मीं राजकुमारी मारिया की पढ़ाई फ्रांस में हुई थी और वो पेरिस के विश्‍वविद्यालय में समाजशास्त्र की प्रोफेसर बनी थीं। राजकुमारी अपने आजाद खयाल के लिए जानी जाती थीं। उन्हें रेड प्रिंसेस के नाम से भी बुलाया जाता था। राजकुमारी का अंतिम संस्कार मैड्रिड में किया गया।

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हांगकांग के लाखों लोगों को ब्रिटेन वीजा देने की तैयारी में

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नई दिल्ली। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा कि अगर चीन राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को हांगकांग में लागू करने पर अड़ा रहा तो वे हांगकांग के लाखों निवासियों को ब्रिटेन की नागरिकता के लिए एक संभावित रास्ता प्रदान करेंगे।

टाइम्स अखबार और साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के लिए लिए लिखे गए एक लेख में उन्होंने कहा, “हांगकांग के कई लोगों को अपने जीवन के उस तरीके से डर लगता है, जिसे चीन ने बरकरार रखने का संकल्प लिया है। अगर चीन उनके डर को सही ठहराने के लिए आगे बढ़ता है, तो ब्रिटेन का अपनी जिम्मेदारी से हटना अच्छे विवेक नहीं माना जा सकता है। इसके बजाय हम अपने दायित्वों का सम्मान करेंगे और एक विकल्प प्रदान करेंगे।”

जॉनसन ने लिखा कि हांगकांग में लगभग 3,50,000 लोग वर्तमान में ब्रिटिश नेशनल (ओवरसीज) पासपोर्ट रखते हैं, जो छह महीने तक ब्रिटेन में वीजा मुक्त रहने की अनुमति देता है। अन्य25 लाख लोग इसके लिए आवेदन करने के पात्र होंगे।

जॉनसन ने लिखा, “अगर चीन अपने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को लागू करता है तो ब्रिटिश सरकार अपने आव्रजन नियमों को बदल देगी और हांगकांग के इन पासपोर्ट के किसी भी धारक को 12महीने की अवधि के लिए ब्रिटेन आने की अनुमति देगी। इनको आव्रजन अधिकार दिए जाएंगे जिसमें काम करने अधिकार भी शामिल है। यह उनके लिये नागरिकता का रास्ता खोलेगा।”

नए कानून को हांगकांग में लोकतंत्र समर्थक विरोध की लहर के बाद लाया गया। इसे “आतंकवाद” और “अलगाववाद” से निपटने के लिए बीजिंग की कठपुतली संसद द्वारा अनुमोदित किया गया। चीन के विरोधियों को डर है कि यह कानून वैश्विक वित्तीय केंद्र में राजनीतिक उत्पीड़न का कारण बनेगा, जबकि ब्रिटेन से 1997 में इस द्वीप को हासिल करते समय चीन ने स्वतंत्रता और स्वायत्तता की गारंटी दी थी।

जॉनसन ने कहा कि हांगकांग का नया कानून उसकी स्वतंत्रता को कम करेगा और नाटकीय रूप से स्वायत्तता को नष्ट करेगा। यदि इसे लागू किया जाता है तो ब्रिटेन के पास हांगकांग के लोगों के साथ इतिहास और दोस्ती के अपने गहन संबंधों को बनाए रखने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा।

लंदन ने पहले ही बीएन (ओ) पासपोर्ट के लिए पात्र लोगों को वीजा अधिकार देने की योजना की घोषणा कर दी है और बीजिंग की अंतरराष्ट्रीय आलोचना में शामिल हो गया है। लेकिन जॉनसन के निजी हस्तक्षेप से दबाव काफी बढ़ गया।

जॉनसन ने इसे झूठा दावा बताकर खारिज कर दिया कि लंदन ने विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया है। जॉनसन ने कहा कि ब्रिटेन एक देश, दो प्रणालियों के तहत हांगकांग की सफलता के अलावा और कुछ नहीं चाहता है। उम्मीद है कि चीन भी यही चाहता है। उन्होंने इसके लिये मिलकर काम करने की अपील की।

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ट्रम्प ने हिंसा पर अंकुश के लिए मिलिट्री लगाने की धमकी दी

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वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हिंसा और लूटपाट की घटनाओं पर नियंत्रण लगाने के लिए सौ वर्ष पुराने राजद्रोह एक्ट लगाने की धमकी दी है। इस एक्ट के अधीन राष्ट्रपति को घरेलू संकट से निजात पाने और हिंसात्मक घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए मिलिट्री तैनात किए जाने के अधिकार हैं। इस में एक शर्त इतनी सी है कि राष्ट्रपति यह अधिकार तभी इस्तेमाल करते हैं जब स्टेट गवर्नर हिंसात्मक आंदोलन पर नियंत्रण कर पाने में विफल हो जाते हैं।

उन्होंने व्हाइट हाउस में रोज़ गार्डन से देश के नाम संदेश में कहा कि मौजूदा क़ानून के अंतर्गत एक शहर अथवा स्टेट में गवर्नर लोगों के जनजीवन को सुरक्षित रखने नें अपने को असमर्थ पाते हैं तो राष्ट्रपति अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर मिलिट्री को उन स्टेट और शहरों में तैनात कर सकता है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ट्रम्प जिस समय देश के नाम यह संदेश दे रहे थे, उसी समय व्हाइट हाउसे के पास आंसू गैस के गोले और रबर बुलेट छोड़े जाने की आवाज सुनाई पड़ रही थी । विदित हो, ट्रम्प पिछले तीन दिनों से यह कहते आ रहे हैं कि हिंसात्मक आंदोलन और लूटपाट को नहीं रोका गया तो उन्हें मजबूरन मिलिट्री तैनात करने पर बाध्य होना पड़ेगा। उन्होंने शनिवार को डेमोक्रेटिक गवर्नर की ओर संकेत देते हुए कहा था कि उन्हें हर संभव हिंसा पर रोक लगानी ही होगी।

इस से पूर्व राष्ट्रपति ने सोमवार को एतिहासिक सेंट जान चर्च का मुआयना किया और इस चर्च के एक हिस्से में की गई आगज़नी की निंदा की। रविवार को कुछ उत्पाती लोगों ने इस चर्च के एक हिस्से में आग लगा दी थी। बताया जाता है कि इस आगज़नी और हिंसात्मक आंदोलन में ‘एंटीफा’ समूह के लोगों का हाथ है।

एंटीफा वामपंथी समुदाय के वे सदस्य हैं, जो हिंसात्मक तौर तरीक़ों से अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे है। इस वर्ग का समाजवाद अथवा वाम मार्ग से कोई मतलब नहीं है, बल्कि अराजकता फैलाना है। कहा जा राहाहाई कि यही वह ग्रुप है, जिसकी वजह से पुलिस अपना काम नहीं कर पा रही है। एंटीफा का कामगार से मोह भंग हो चुका है, बल्कि वे अपना सारा ध्यान नस्लीय समस्याओं पर अपना ध्यान केंद्रित किए हुए हैं। न्यू यॉर्क पुलिस चीफ़ टेरेंस मोनाहन ख़ुद प्रदर्शनकारियों के बीच घुस गए और उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की।

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अश्वेत की मौत के बाद अमेरिका में बवाल, 40 शहरों में कर्फ्यू, ट्रम्प को अंडरग्राउंड बंकर में जाना पड़ा

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नई दिल्ली। अमेरिका में अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद से हालात बेहद खराब हो गए हैं। राजधानी वॉशिंगटन डीसी समेत 40 शहरों में कर्फ्यू लगाया जा चुका है। रविवार रात को भी प्रदर्शनकारियों ने व्हाइट हाउस के सामने प्रदर्शन किया। इसके बाद सुरक्षाबलों को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक शुक्रवार को व्हाइट हाउस के सामने प्रदर्शनों के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को कुछ देर के लिए अंडरग्राउंड बंकर में ले जाना पड़ा था। व्हाइट हाउस के करीब स्थित एक चर्च में आगजनी की गई है।

नेशनल गार्ड्स तैनात

शहरों और राज्यों के अधिकारियों ने हजारों नेशनल गार्ड्स को तैनात किया और प्रदर्शनकारियों के आंदोलनों को धीमा करने के लिए कर्फ्यू लागू किया है। बड़े पैमाने पर सार्वजनिक यातायात व्यवस्था को बंद कर दिया गया है। लेकिन इससे कई शहरों में भारी हिंसक प्रदर्शनों को रोकने में कोई खास मदद नहीं मिली है। राजधानी वाशिंगटन में व्हाइट हाउस के बाहर तनाव फैल गया है। पिछले तीन दिनों से प्रदर्शन कर रहे 1,000 से अधिक लोगों पर पुलिस ने आंसू गैस और बेहोश करने वाले ग्रेनेड दागे।

पत्रकारों पर भी हमला

एक आंकड़े के अनुसार विरोध प्रदर्शन कर रहे कम से कम 4,400 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारियां चोरी करने और राजमार्गों को अवरुद्ध करने से लेकर कर्फ्यू तोड़ने तक के मामलों में की गईं थीं। न्यूयॉर्क, शिकागो, फिलाडेल्फिया जैसे बड़े शहरों में कर्फ्यू के बावजूद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जबरदस्त झड़पें हुईं हैं। कुछ पत्रकारों पर भी हमले की खबरें हैं।

सरकारी दफ्तरों को बंद करने का आदेश

अमेरिका में घरेलू आपात स्थिति से निपटने के लिए नेशनल गार्ड के जवानों को वाशिंगटन के अलावा 15 और राज्यों में तैनात किया गया है। प्रदर्शनकारियों ने बड़े पैमाने पर वाहनों में तोड़फोड़ की और दुकानों में लूटपाट और आगजनी की है। हिंसा को देखते हुए कैलिफोर्निया ने सभी सरकारी दफ्तरों को बंद करने का आदेश दिया है।

इन शहरों में भारी प्रदर्शन

मिनियापोलिस में एक लारी ड्राइवर को उस समय गिरफ्तार किया गया जब वह बैरियर तोड़कर अपने ट्रक को भीड़ की तरफ बढ़ा रहा था। लोगों की भीड़ ने ड्राइवर को खींचकर बाहर निकाला और उसकी पिटाई की। उसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। अटलांटा, ओक्लाहोमा, बोस्टन और मियामी जैसे शहरों में भी भारी प्रदर्शन हुए हैं। अटलांटा और जॉर्जिया में तो जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने के कारण दो पुलिस अधिकारियों को बर्खास्त भी कर दिया गया है।

ये है पूरा मामला

ये पूरा बवाल एक श्वेत पुलिस अधिकारी डेरेक चाउविन की उस हरकत की वजह से हो रहा है, जिसमें उसने 25 मई को 46 वर्षीय अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड को उसकी गर्दन पर घुटना रखकर पकड़ा। इस दौरान फ्लॉयड बार-बार कहता रहा कि मैं सांस नहीं ले सकता..प्लीज, मैं सांस नहीं ले पा रहा हूं। मुझे छोड़ें। लेकिन पुलिस अफसर की निर्ममता ने जॉर्ज फ्लॉयड की जान ले ली. इस घटना के बाद पुलिस अफसर पर तो एक्शन हो गया है, लेकिन जनता सड़कों पर उतर आई है।

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