अफगानिस्तान संकट : सालेह का तालिबान और पाकिस्तान को करारा जवाब, जानिए क्या कहा

अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी के पद छोड़ने के बाद अमरुल्लाह सालेह ने खुद को राष्ट्रपति घोषित किया है। सालेह ने तालिबानी हुकूमत और पाकिस्तान पर करारा निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए कहा है कि सभी देशों को कानूनी कायदों का सम्मान करना चाहिए, हिंसा का नहीं।
 
अफगानिस्तान संकट : सालेह का तालिबान और पाकिस्तान को करारा जवाब, जानिए क्या कहा  

नई दिल्ली। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी के पद छोड़ने के बाद अमरुल्लाह सालेह ने खुद को राष्ट्रपति घोषित किया है। सालेह ने तालिबानी हुकूमत और पाकिस्तान पर करारा निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए कहा है कि सभी देशों को कानूनी कायदों का सम्मान करना चाहिए, हिंसा का नहीं। अफगानिस्तान इतना बड़ा है कि पाकिस्तान इसे निगल नहीं सकता और तालिबान इस पर शासन नहीं कर सकता। अपने इतिहास में अमानवीयता और आतंकियों के आगे झुकने का अध्याय मत जुड़ने दीजिए।

सालेह ने ये भी कहा है कि राष्ट्रध्वज फहराने वालों और देश के सम्मान के लिए आगे आने वालों को सलाम करते हैं। सालेह का ये बयान जलालाबाद की घटना के बाद आया है, क्योंकि जलालाबाद समेत कुछ इलाकों से गुरुवार को अफगानी झंडा लहराने की तस्वीरें सामने आई हैं।

दूसरी तरफ तालिबान भले ही दावा कर रहा है कि इस बार उसका शासन पहले जैसा नहीं होगा, लेकिन हकीकत कुछ और ही सामने आ रही है। तीन दिन पहले अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर कब्जे के बाद तालिबान ने कहा था कि जो लोग अफगानिस्तान छोड़कर जाना चाहते हैं उन्हें रोका नहीं जाएगा, लेकिन अब तालिबान ने काबुल एयरपोर्ट को घेर लिया है और लोगों को एयरपोर्ट पहुंचने से रोक रहा है। सिर्फ विदेशियों को ही जाने दिया जा रहा है।

पिछले दो दिनों की जो तस्वीरें सामने आई हैं उनमें दिख रहा है कि अफगानिस्तान छोड़ने के लिए काबुल एयरपोर्ट पहुंचे अफगानियों पर तालिबान के दहशतगर्द गोलियां चला रहे हैं, कोड़े बरसा रहे हैं और उन पर धारदार हथियार इस्तेमाल कर रहे हैं। इस बीच काबुल एयरपोर्ट पर गुरुवार रात फिर से फायरिंग हुई है। हालांकि, ये फायरिंग भीड़ को कंट्रोल करने के लिए अमेरिकी सैनिकों ने चेतावनी के तौर पर की थी।

उधर, अफगानिस्तान की सत्ता संभालने में जुटे तालिबान ने अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं। तालिबानी नेता वहीदुल्लाह हाशिमी ने कहा है कि अफगानिस्तान में कोई लोकतांत्रिक व्यवस्था नहीं होगी, क्योंकि यहां इसका कोई वजूद नहीं है। हाशिमी ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में कहा है कि तालिबान को ये बताने की जरूरत नहीं कि अफगानिस्तान की हुकूमत कैसी होगी, क्योंकि ये एकदम साफ है। यहां शरिया कानून चलेगा।