Friday, May 27, 2022
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HATE SPEECH पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: उत्तराखंड सरकार को चेतावनी, हिमाचल सरकार को नोटिस

नई दिल्ली। Hate speech in Dharma Sansad: धर्म संसद में हेट स्पीच (HATE SPEECH) मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अख्तिया किया है। शीर्ष अदालत ने जहां 17 अप्रैल को ऊना में हुई धर्म संसद को लेकर हिमाचल प्रदेश की सरकार को नोटिस जारी किया है। वहीं उत्तराखंड सरकार को भी चेतावनी दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने ऊना में हुई धर्म संसद को लेकर हिमाचल प्रदेश की सरकार से पूछा है कि ऐसे मामलों के लिए पहले आ चुके निर्देशों के पालन के लिए क्या कदम उठाए गए।

सुप्रीम कोर्ट ने कल यानि 27 अप्रैल को उत्तराखंड के रुड़की में होने जा रहे धर्म संसद के लिए राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि भड़काऊ भाषण पर लगाम नहीं लगी तो उच्च अधिकारियों को जिम्मेदार माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य सचिव को हलफनामा देने को कहा कि कार्यक्रम में कुछ गलत होने से रोकने के लिए कदम उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता कुर्बान अली के वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि प्रशासन ने भड़काऊ बातों से रोकने के लिए ज़रूरी कदम नहीं उठाए।

22 अप्रैल को कोर्ट ने दिल्ली में 19 दिसंबर 2021 को हुए हिंदू युवा वाहिनी के कार्यक्रम पर पुलिस के जवाब पर सफाई मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने हैरानी जताते हुए पूछा कि यह सब इंस्पेक्टर रैंक के जांच अधिकारी का स्टैंड है या डीसीपी का।

दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि 21 दिसंबर 2021 को दिल्ली में हिन्दू युवा वाहिनी के कार्यक्रम में सुदर्शन टीवी के एंकर सुरेश चव्हाणके ने मुस्लिम समुदाय के खिलाफ हेट स्पीट नहीं दी थी। दिल्ली पुलिस ने मांग की है कि याचिका खारिज होनी चाहिए।

दक्षिण पूर्वी दिल्ली के डीसीपी इशा पांडेय की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि कार्यक्रम के वीडियो को बारीकी से देखने पर ऐसा कहीं नहीं लगा कि कानून का उल्लंघन हुआ है और किसी धर्म के लोगों के खिलाफ माहौल बनाया गया हो। दिल्ली पुलिस ने कहा है कि अपने हितों के लिए कार्यक्रम करने से किसी को रोका नहीं जा सकता है। दिल्ली पुलिस ने कहा है कि याचिकाकर्ता कुर्बान अली और अंजना प्रकाश देसाई ने न तो कभी पुलिस को शिकायत दी और न ही किसी दूसरी एजेंसी को। वे सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। याचिकाकर्ता न तो शिकायकर्ता हैं और न ही पीड़ित। ये गलत प्रवृति है जिसे बढ़ावा नहीं देना चाहिए।

दरअसल 12 जनवरी को कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को इस बात की अनुमति दी थी कि वे दूसरे स्थानों पर हुई ऐसी घटनाओं के खिलाफ स्थानीय प्रशासन को अपना प्रतिवेदन दें। सुप्रीम कोर्ट में याचिका पत्रकार कुर्बान अली और पटना हाईकोर्ट के पूर्व जज और वकील अंजना प्रकाश ने दायर किया है। एक याचिका देशभर में मुस्लिम विरोधी भड़काऊ भाषण के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए जमीयत उलेमा-ए-हिंद और मौलाना महमूद मदनी ने भी दायर किया है। याचिका में कहा गया है कि मुस्लिमों के खिलाफ भड़काऊ भाषणों की वजह से कई जाने गई हैं। भड़काऊ बयान देने वालों के खिलाफ पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।

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