Friday, October 7, 2022
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हिजाब विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने रखा फैसला सुरक्षित, 10 दिनों में पूरी हुई सुनवाई

हिजाब समर्थकों के अलावा कर्नाटक सरकार और कॉलेज के शिक्षकों की भी कोर्ट ने दलीलें सुनीं

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हिजाब मामले पर गुरुवार को सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया है। जस्टिस हेमंत गुप्ता और सुधांशु धूलिया की बेंच ने इस मामले की 10 दिनों तक सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने हिजाब समर्थक याचिकाकर्ताओं के अलावा कर्नाटक सरकार और कॉलेज शिक्षकों की भी दलीलें सुनीं।

हिजाब कोई अनिवार्य धार्मिक परंपरा नहीं : प्रभूलिंग नवडगी

सुनवाई के दौरान 21 सितंबर को कर्नाटक सरकार के अलावा उन कॉलेज शिक्षकों की ओर से जिरह की गई जिन्होंने कॉलेज में हिजाब पहनने से मना किया था। कोर्ट ने कर्नाटक सरकार से हिजाब के पीछे की साजिश के मामले में दाखिल चार्जशीट और सर्कुलर में लिखे कन्नड़ शब्दों के अनुवाद की प्रति मांगी। सुनवाई के दौरान कर्नाटक सरकार के एडवोकेट जनरल प्रभुलिंग नवाडगी ने कहा कि हिजाब कोई अनिवार्य धार्मिक परम्परा नहीं है। कुरान में उसके जिक्र मात्र से वो धर्म का अनिवार्य हिस्सा नहीं हो जाता। कुरान में लिखा हर शब्द अनिवार्य परंपरा नहीं कहा जा सकता है।

जो भी कुरान में लिखा है वो अल्लाह का आदेश : हिजाब समर्थक

इस पर जस्टिस गुप्ता ने कहा कि हिजाब समर्थक पक्ष का मानना है कि जो भी कुरान में लिखा है, वो अल्लाह का आदेश है। उसे मानना अनिवार्य है। तब नवाडगी ने कहा कि हम कुरान के विशेषज्ञ नहीं है, पर खुद सुप्रीम कोर्ट का पुराना फैसला है कि कुरान में मौजूद हर शब्द धार्मिक हो सकता है, पर ज़रूरी नहीं कि वो अनिवार्य धार्मिक परंपरा हो। जस्टिस हेमंत गुप्ता ने कहा कि मैं लाहौर हाईकोर्ट के एक जज को जानता हूं, वो भारत भी आया करते थे। मैंने कभी उनकी लड़कियों को हिजाब पहने हुए नहीं देखा। जब मैं यूपी और पटना जाता हूं, तो कई मुस्लिम परिवारों से बातचीत होती है। मैंने किसी महिला को हिजाब पहने नहीं देखा।

हिजाब मुस्लिम महिलाओं की गरिमा को बढ़ाता है : दुष्यंत

सुनवाई के दौरान 20 सितंबर को याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि हिजाब मुस्लिम महिलाओं की गरिमा को बढ़ाता है। यह संविधान की धारा 19 और 21 के तहत एक संरक्षित अधिकार है। दवे ने कहा कि कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला पूरी तरह से अस्थिर है और अवैध है। हाईकोर्ट का फैसला धारा 14, 19, 21 और 25 का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने अनिवार्य धार्मिक परंपरा की कसौटी पर सार्वजनिक स्थानों पर हिजाब पहनने की वैधता का परीक्षण करने में गलती की।

2021 से पहले मुस्लिम लड़कियां नहीं पहन रही थी हिजाब

कर्नाटक सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि 2021 से पहले कोई मुस्लिम लड़की हिजाब नहीं पहन रही थी और ना ही ऐसा कोई सवाल उठा। ये कहना ग़लत होगा कि सरकार ने सिर्फ हिजाब बैन किया है, दूसरे समुदाय के लोगों को भी भगवा गमछा पहनने से रोका गया है। मेहता ने कहा कि 2022 में पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ने सोशल मीडिया पर हिजाब पहनने के लिए अभियान शुरू किया। सोशल मीडिया पर इस तरह के मैसेज फैलाये गए। हिजाब पहनने का फैसला बच्चों का नहीं था। बच्चे उस हिसाब से काम कर रहे थे, जैसा उनको समझाया गया था।

 

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