वाराणसी: काशी में बोले गृहमंत्री अमित शाह, मुझे गुजराती से ज्यादा हिंदी भाषा पसंद है

वाराणसी में दो दिवसीय दौरे के दूसरे दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सम्मलेन का उद्घाटन किया. इस दौरान शाह ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें गुजराती से ज्यादा हिंदी पसंद है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, “मुझे गुजराती से ज्यादा हिंदी भाषा पसंद है। हमें अपनी राजभाषा को मजबूत करने की जरूरत है। हमें राष्ट्रभाषा को सशक्त बनाने की आवश्यकता है .राजभाषा सम्मेलन में गृह मंत्री शाह ने किया रामचरितमानस का जिक्र. उन्होंने बताया यह मानव जीवन को उन्नत बनाने का रास्ता है. एक आदर्श पिता, पुत्र, बहू, शासन का जिक्र रामायण में है. रामायण में आदर्श दुश्मन का जिक्र भी किया गया है. 


 
 
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वाराणसी: काशी में बोले गृहमंत्री अमित शाह, मुझे गुजराती से ज्यादा हिंदी भाषा पसंद है

वाराणसी में दो दिवसीय दौरे के दूसरे दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सम्मलेन का उद्घाटन किया. इस दौरान शाह ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें गुजराती से ज्यादा हिंदी पसंद है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, “मुझे गुजराती से ज्यादा हिंदी भाषा पसंद है। हमें अपनी राजभाषा को मजबूत करने की जरूरत है। हमें राष्ट्रभाषा को सशक्त बनाने की आवश्यकता है .राजभाषा सम्मेलन में गृह मंत्री शाह ने किया रामचरितमानस का जिक्र. उन्होंने बताया यह मानव जीवन को उन्नत बनाने का रास्ता है. एक आदर्श पिता, पुत्र, बहू, शासन का जिक्र रामायण में है. रामायण में आदर्श दुश्मन का जिक्र भी किया गया है. 

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने हिंदी को वैश्विक मंच पर पहुंचाने का काम किया है. हमारी सरकार की कोशिश है कि हिंदी को जन-जन की भाषा बनाई जाए. इस लक्ष्य में हमें सफलता भी मिल रही है.

अमित शाह ने कहा कि काशी से ही शिक्षा की भाषा हिंदी में करने की मांग पहली बार उठी थी. अंग्रेजी सरकार ने उर्दू की जगह हिंदी को नौकरी के लिए चयनित किया. काशी नागरी सभा ने हिंदी शब्दकोष बनाने की तरफ कदम बढ़ाए थे. काशी में कामता प्रसाद गुरु ने पहला व्याकरण लिखा और पहला शब्दकोष भी यहीं बना. रामचंद्र शुक्ल ने हिंदी साहित्य की रचना काशी में की थी. काशी की धरती से पहली हिंदी पत्रिका और हिंदी थियेटर की शुरुआत हुई. भाषा तो बन गई और साहित्य तो रचा जाने लगा. हिंदी की पढ़ाई कैसे हो. इसकी चिंता मदन मोहन मालवीय ने की और बीएचयू की स्थापना की.