उत्तराखंड में कौन थामेगा एनडी की कमान, बेटे को नहीं मिला था टिकट, हार गया था भतीजा

उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी तेज हो गयी है। इसी कड़ी में बड़ा सवाल यह है कि चुनावी साल में सर्वप्रिय हो चुके एनडी की राजनीतिक विरासत भी किसी के हाथ में होगी। जीते जी वह बेटे रोहित शेखर तिवारी को टिकट नहीं दिला सके थे। वहीं, 2012 में पार्टी ने भतीजे मनीषी तिवारी को गदरपुर से चुनाव लड़ाया था। मगर मनीषी जीत नहीं सके।

 
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उत्तराखंड में कौन थामेगा एनडी की कमान, बेटे को नहीं मिला था टिकट, हार गया था भतीजा

उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी तेज हो गयी है। इसी कड़ी में बड़ा सवाल यह है कि चुनावी साल में सर्वप्रिय हो चुके एनडी की राजनीतिक विरासत भी किसी के हाथ में होगी। जीते जी वह बेटे रोहित शेखर तिवारी को टिकट नहीं दिला सके थे। वहीं, 2012 में पार्टी ने भतीजे मनीषी तिवारी को गदरपुर से चुनाव लड़ाया था। मगर मनीषी जीत नहीं सके।

राजनीतिक जीवन की शुरुआत में ही एनडी का सानिध्य मिलने पर कई लोगों ने बड़ा मुकाम भी हासिल किया। हल्द्वानी से लेकर यूपी तक ऐसे कई नाम है। लेकिन अंतिम समय में वह शारीरिक तौर पर कमजोर होने के कारण वह बेटे रोहित शेखर को टिकट नहीं दिलवा सके।अब चुनावी दौर आते ही पूर्व सीएम स्व. एनडी तिवारी हर किसी खासकर सियासी दलों को याद आने लगे हैं। सवाल यह खड़ा हो रहा है कि क्या कोई उनकी राजनैतिक विरासत को आगे लेकर जाएगा। बात अगर पारिवारिक सदस्य की करें तो कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता दीपक बल्यूटिया हल्द्वानी सीट पर खासा सक्रिय हैं। उन्होंने केंद्रीय पर्यवेक्षकों के समक्ष टिकट की इच्छा भी जाहिर कर दी। लेकिन नेता प्रतिपक्ष डा. इंदिरा हृदयेश के निधन के बाद बेटे सुमित हृदयेश उनकी विरासत को आगे बढ़ाने की पुरजोर कोशिश में जुटे हैं।